फुलवारीशरीफ, अजीत। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना में आयोजित द्वितीय दीक्षांत समारोह न सिर्फ डिग्री वितरण का अवसर रहा बल्कि यह युवा चिकित्सकों के लिए सेवा, समर्पण और चिकित्सा नैतिकता का संदेश देने वाला प्रेरणादायी मंच बन गया. समारोह में राज्यपाल सैय्यद अता हसनैन सहित कई दिग्गज नेताओं और चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया और विद्यार्थियों को समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराया.अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना का द्वितीय दीक्षांत समारोह इस बार सिर्फ औपचारिक आयोजन नहीं रहा बल्कि यह स्वास्थ्य सेवा के भविष्य की दिशा तय करने वाला संदेशपूर्ण मंच बन गया जहां से नई पीढ़ी के डॉक्टर समाज सेवा का संकल्प लेकर निकले.
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सैय्यद अता हसनैन द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया. अपने दीक्षांत भाषण में उन्होंने साफ कहा कि चिकित्सा केवल करियर नहीं बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है. उन्होंने युवा डॉक्टरों से अपील की कि वे गरीब और वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील रहें और इलाज के साथ भरोसा भी दें. राज्यपाल ने कहा कि आज के दौर में तकनीक और आधुनिक चिकित्सा तेजी से बदल रही है लेकिन डॉक्टरों को अपने मूल्यों और नैतिकता से कभी समझौता नहीं करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि मरीजों का विश्वास ही डॉक्टर की सबसे बड़ी पूंजी होता है।
समारोह के मुख्य अतिथि सैय्यद अता हसनैन ने अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि डॉक्टर केवल पेशा नहीं बल्कि समाज की सेवा का माध्यम है. उन्होंने कहा कि युवा चिकित्सकों को करुणा, नैतिकता और पेशेवर उत्कृष्टता के उच्च मानकों को अपनाना होगा ताकि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके. उन्होंने तकनीक आधारित चिकित्सा, अनुसंधान और नवाचार को अपनाने की जरूरत बताई और कहा कि बदलते समय में चिकित्सा क्षेत्र में लगातार सीखते रहना ही सफलता की कुंजी है. उन्होंने यह भी कहा कि मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार और भरोसा कायम करना एक डॉक्टर की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है.
राज्यपाल ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में एम्स पटना देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा. केंद्रीय राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप होता है और वह मरीजों को केवल दवा ही नहीं बल्कि भरोसा और जीवन जीने की उम्मीद देता है. उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा में मानवीय संवेदना सबसे महत्वपूर्ण है. सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से डिग्री प्राप्त करना सौभाग्य की बात है और यहां से निकलने वाले डॉक्टर देश और समाज के लिए गौरव बनेंगे. वहीं सांसद तारिक अनवर ने ग्रामीण और गरीब तबके के लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।
एम्स पटना के अध्यक्ष प्रो. राधा कृष्ण धीमान ने विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा की श्रेष्ठ परंपराओं को बनाए रखने और जीवनभर सेवा भाव से कार्य करने की सलाह दी. कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने संस्थान की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि एम्स पटना चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी सेवा में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है.कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्थान स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि अस्पताल की क्षमता बढ़ाने और अत्याधुनिक उपकरणों के विस्तार पर लगातार काम किया जा रहा है. उन्होंने भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि एम्स पटना आने वाले वर्षों में पूर्वी भारत का प्रमुख चिकित्सा केंद्र बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है.
समारोह में अन्य वक्ताओं ने कहा कि पहले जहां गंभीर इलाज के लिए मरीजों को बाहर जाना पड़ता था वहीं अब एम्स पटना में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं. संस्थान की लगातार बढ़ती सेवाओं ने इसे क्षेत्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था का मजबूत स्तंभ बना दिया है. कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार एम्स पटना में मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है और नई-नई चिकित्सा सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं. संस्थान में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है जिससे जटिल बीमारियों का इलाज भी अब यहीं संभव हो रहा है. समारोह का मुख्य आकर्षण छात्रों को डिग्री और मेडल प्रदान करना रहा. मंच से मेधावी विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना की गई और अभिभावकों की मौजूदगी ने इस पल को और भावुक बना दिया. समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को राज्यपाल द्वारा स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया. बड़ी संख्या में अभिभावकों और संकाय सदस्यों की मौजूदगी ने इस अवसर को भावुक और यादगार बना दिया।
