तब्लीगी जमात के खिलाफ सऊदी सरकार का हालिया रुख बेहद दुर्भाग्यपूर्ण : हजरत अमीर-ए- शरीयत

 तब्लीगी जमात के खिलाफ सऊदी सरकार का हालिया रुख बेहद दुर्भाग्यपूर्ण : हजरत अमीर-ए- शरीयत

फुलवारीशरीफ(अजीत यादव): तब्लीगी जमात के खिलाफ सऊदी सरकार के हालिया रुख पर नाराजगी और अफसोस व्यक्त करते हुए बिहार, ओडिशा और झारखंड के अमीर-ए- शरीयत हजरत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने सऊदी सरकार के कदम को खेदजनक बताया। उन्होंने कहा कि तब्लीगी जमात को अंधविश्वास और आतंकवाद आदि से जोड़ना बिल्कुल गलत और हकीकत के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि तब्लीगी जमात मौलाना इलियास साहब (रहमतुल्लाह अलैह) द्वारा स्थापित दुनिया की निर्विवाद जमात है जिसने अपनी सीमा में रहकर समाज को सुधारने के कई महत्वपूर्ण तथा आश्चर्यजनक कार्य किए हैं। इस जमात को पूरी दुनिया में सम्मान की नजर से देखा जाता है। यह एक ऐसी जमात है जिसके लोग अपनी आर्थिक तथा शारीरिक पूंजी लगाते हैं और घूम घूम कर समाज सुधार के कार्य करते हैं । ये न किसी सरकार से कोई चंदा लेते हैं। तबलीगी जमात ने शुरू से ही सीमित दायरे में अपना काम किया ,जिसके कारण इस का कभी किसी संप्रदाय या किसी अन्य धार्मिक समूह से टकराव नहीं हुआ।

गौरतलब है कि सऊदी सरकार के इस्लामिक मामलों, दावह तथा इरशाद के मंत्रालय की ओर से सऊदी अरब की मस्जिदों के इमामों के लिए हाल ही में एक गाइडेंस जारी हुई है। मंत्रालय से जारी अधिसूचना में शुक्रवार के खुतबा में लोगों को तब्लीगी जमात के खिलाफ चेतावनी देने का निर्देश दिया गया है। मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना और इस्लामिक मामलों के मंत्री के ट्वीट ने तब्लीगी जमात पर नवाचारों, अंधविश्वासों और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और इमामों को आदेश दिया गया कि लोगों को इन से से दूर रहने के लिए कहें । सऊदी सरकार के इस कदम से दुनिया भर के मुसलमानों में बेचैनी और नाराजगी है और हर तरफ इसकी निंदा की जा रही है। बिहार, ओडिशा और झारखंड के अमीरे शरीयत हजरत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने भी इस कदम की निंदा की है। और सऊदी अरब के इस्लामी मामलों के मंत्रालय और दिल्ली में सऊदी दूतावास को एक पत्र लिखकर आदेश की समीक्षा का अनुरोध किया। कहा कि सऊदी सरकार के इस कदम से उन सभी को ठेस पहुंची है और उनकी भावनाएं आहत हुई हैं।

सऊदी सरकार का पूरी दुनिया में सम्मान किया जाता है और दो पवित्र तीर्थस्थलों (मस्जिद-ए- हराम तथा मस्जिद-ए- नबवी )के कारण, दुनिया भर के मुसलमान सऊदी अरब की सरकार को सम्मान के साथ देखते हैं। सरकार के इस नासमझी भरे कदम का दुनिया भर के मुसलमानों के सम्मान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।इसलिए हम सरकार से इस आदेश को तुरंत रद्द करने की मांग करते हैं। हजरत अमीर शरीयत ने भारत सरकार से सरकारी स्तर पर सऊदी सरकार को पत्र लिखकर इस आदेश की समीक्षा करने तथा इस फैसले को रद्द करने की मांग की है।

न्यूज़ क्राइम 24 संवाददाता

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