अररिया, रंजीत ठाकुर। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कालाजार, एईएस-जेई व मलेरिया रोग संबंधी मामलों की समीक्षात्मक बैठक शुक्रवार को जिला स्वास्थ्य समिति सभागार में आयोजित की गयी। सिविल सर्जन विधानचंद्र सिंह की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षात्मक बैठक में वेक्टर जनित रोग नियंत्रण संबंधी विभिन्न मामलों की गहन समीक्षा की गयी। जिले में एईएस-जेई संबंधी ममालों पर प्रभावी नियंत्रण सहित आगामी 25 अप्रैल को आयोजित होने वाले राष्ट्रीय मलेरिया दिवस के सफल आयोजन पर विस्तृत चर्चा की गयी। कार्यक्रम में डीवीबीडीसीओ डॉ अजय कुमार सिंह, डीआईओ डॉ मोईज, सीडीओ डॉ वाईपी सिंह, डीपीएम संतोष कुमार, डीएमएनई पंकज कुमार, डीपीसी राकेश कुमार, डीसीएम सौरव कुमार, एसएमसी यूनिसेफ आदित्य कुमार सहित सभी एमओआईसी, बीएचएम सहित संबंधित अन्य स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद थे।
मच्छर जनित रोगों के प्रति करें लोगों को जागरूक
समीक्षात्मक बैठक में सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने जिले में एईएस-जेई के संभावित खतरों के प्रति आगाह कराते हुए सभी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों के उपचार संबंधी सभी जरूरी इंतजाम सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी रोग पर प्रभावी नियंत्रण के लिये जन जागरूकता जरूरी है। मलेरिया, डेंगू सहित मच्छर जनित अन्य रोगों के संभावित खतरे व इससे बचाव संबंधी उपायों के प्रति लोगों को जागरूक कर इन रोगों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सभी पीएचसी प्रभारी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को समुदाय स्तर पर विभिन्न गतिविधियों के माध्यम लोगों को इस संबंध में जागरूक करने का निर्देश उन्होंने दिया।
एईएस-जेई के उपचार में निर्धारित एसओपी का अनुपालन जरूरी जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह ने जिले में मलेरिया का आतंक घट कर बेहद सीमित हो चुका है। उड़ीसी, बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड जैसे राज्य अभी भी मलेरिया से अक्रांत हैं। मलेरिया संबंधी मामलों की रिपोर्टिंग व इसका डाक्यूमेंटेशन जरूरी है। उन्होंने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि अपने संस्थान में बुखार सहित संबंधित अन्य लक्षणों वाले मरीजों का मलेरिया जांच सुनिश्चित कराया जाये। मलेरिया दिवस पर विभिन्न स्तरों पर जागरूकता संबंधी कार्यक्रम आयोजित किये जायें।
एईएस-जेई के नियंत्रण संबंधी विषय पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि संबंधित मरीजों में आमतौर पर बुखार, बेहोशी, हाइपर ग्लेशिमिया व कनवलसन की शिकायत होती है। इस तरह की शिकायत वाले मरीजों का तत्काल प्राथमिक उपचार जरूरी होता है। इसके बाद ही उन्हें हायर सेंटर रेफर किया जाना चाहिये। इससे एईएस-जेई की वजह से मृत्यु संबंधी मामलों को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को एईएस-जेई के उपचार को लेकर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिड्योर (एसओपी) उपलब्ध कराते हुए इसके मुताबिक रोग प्रबंधन संबंधी इंतजाम विशेष मेडिकल किट की उपलब्धता सभी स्वास्थ्य संस्थानों में सुनिश्चित कराने को कहा।
डेंगू के खतरों के प्रति अभी से सतर्क रहने की जरूरत
समीक्षात्मक बैठक में जानकारी देते हुए डीवीबीडीसीओ डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि बीते साल जिले में डेंगू के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गयी। खासबात ये कि डेंगू संबंधी 75 फीसदी मामलों में रोगियों का कोई ट्रेवल हिस्ट्री नहीं पाया गया। इससे जाहिर होता है कि स्थानीय स्तर पर भी रोग का संकट गहराने लगा है। लिहाजा इस वर्ष भी डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी की संभावना व्यक्त करते हुए उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय को बेहतर बनाते हुए अभी से ही इसके नियंत्रण संबंधी उपायों की मजबूती को लेकर जरूरी कदम उठाने पर जोर दिया।
