पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) पटना विश्वविद्यालय सत्र-2025 के पीएचडी (Ph.D) नामांकन में (CSIR, UGC-NET) के माध्यम से Only Ph.D उत्तीर्ण छात्रों से आवेदन फॉर्म भरवाने, इंटरव्यू लेने तथा मेरिट सूची में चयन होने के बावजूद नामांकन से वंचित किए जाने के विरोध में, एवं नामांकन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, पक्षपात और अपारदर्शिता के आरोपों को लेकर एआईएसएफ, “रिसर्च स्कॉलर संघर्ष समिति”और पीएफवीसी के संयुक्त बैनर तले चल रहा अनिश्चितकालीन धरना अब भूख हड़ताल में बदल गया है। भूख हड़ताल का दूसरा दिन भी जारी है। कल से पीएफवीसी के बिहार प्रदेश महासचिव विधानन्द पासवान अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। AISF के राज्य सह-सचिव सुशील उमाराज ने कहा कि पटना विश्वविद्यालय के कुलपति तानाशाही रवैया अपना रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएचडी नामांकन में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और पक्षपात हुआ है।
विश्वविद्यालय को मेरिट सूची के साथ-साथ स्नातकोत्तर एवं इंटरव्यू के अंक भी सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि नामांकन प्रक्रिया पारदर्शी हो सके। इससे यह स्पष्ट होगा कि किसी छात्र को कितना अंक मिला और जो छात्र नामांकन से वंचित रह गए, उसका कारण अंक कम होना था या उन्हें जानबूझकर बाहर किया गया। उन्होंने कहा कि छात्रों द्वारा नामांकन प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों का कुलपति को संज्ञान लेना चाहिए और जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए। पटना विश्वविद्यालय की छात्र नेत्री जहान्वी रॉय ने कहा कि विश्वविद्यालय की नामांकन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और पक्षपात बड़े पैमाने पर हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेताओं, मंत्रियों और राज्यपाल की पैरवी पर बड़े पूंजीपति घरानों के छात्रों का नामांकन कर लिया जाता है, जबकि गरीब, किसान और मजदूर वर्ग से आने वाले छात्रों को पीएचडी नामांकन से वंचित कर दिया जाता है। अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में Ph.D शोधार्थी नीतीश कुमार, छात्र नेत्री प्रीति पासवान, कृष्णा कुमार, सत्यम कुमार, अंकुश कुमार, विजय पासवान, अनिकेत कुमार, आशीष कुमार, शिवम कुमार सहित कई अन्य छात्र शामिल हुए।
