बिहार

व्रतियों ने किया खरना, प्रसाद ग्रहण करने वालों में दिखा छठी मईया के प्रति आस्था का उत्साह

फूलवारीशरीफ(अजीत यादव): लोक आस्था का महापर्व छठ पर्व को लेकर तमाम श्रद्धालुओं में जबर्दस्त का उत्साह देखा जा रहा है. सोमवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ सूर्य उपासना का महापर्व के दूसरे दिन मंगलवार को तमाम छठ व्रतियों ने पूरे दिन उपवास रहकर संध्या में खरना पूजन किया. व्रतियों ने खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ कर दिया. छठ पूजा के दूसरे दिन खरना का प्रसाद बनाने के लिए भी श्रद्धालुओं में उत्साह देखा गया.बता दें कि बुधवार शाम को व्रती और श्रद्धालु छठ घाटों में पहुंचकर पहला अ‌र्घ्य देंगे, जबकि गुरुवार सुबह दूसरे अ‌र्घ्य के साथ सूर्योपासना का यह महापर्व संपन्न हो जाएगा।जगदेव पथ रोड में बीएमपी तालाब, फूलवारी में प्रखंड शिव मंदिर घाट, गणेश तालाब ,करोड़ीचक, बहादुरपुर घाट, गोनपुरा सूर्य मंदिर तालाब, खगौल लख सोन नहर घाट, राजघाट नवादा, पुनपुन नदी घाट समेत छतों पर भी लोगो ने सूर्य भगवान को अर्ध्य देने की तैयारी कर रखी है.

मंगलवार को छठ व्रतियों ने गंगा नदी समेत विभिन्न नदियों से पवित्र जल लाकर खरना का महाप्रसाद बनाया. दोपहर में व्रतियों ने पूरी शुद्धता व पवित्रता के भाव से इस प्रसाद को तैयार किया. प्रसाद के रूप में कहीं खीर, रसिया बनी तो कई जगहों पर अरवा चावल व चना दाल का प्रसाद बना. संध्या में महिलाओं ने स्नान करने के बाद भगवान का पूजन किया. इसके बाद सभी तरह के प्रसाद को भगवान को भोग लगाकर व्रतियों ने खरना का प्रसाद ग्रहण किया. इस दौरान घर की महिलाओं ने छठि मईया के पारंपरिक गीत गाए. व्रतियों के खरना प्रसाद ग्रहण करने के बाद तमाम परिवार के लोगों ने प्रसाद खाए. वहीं श्रद्धालुओं ने पूजा स्थल पर मत्था टेका और प्रसाद के रूप में खीर और रोटी ग्रहण क़िया. खरना का प्रसाद खाने के लिए हर जगह से श्रद्धालु देर शाम तक व्रतियों के घर पहुंचकर खरना का प्रसाद खाते देखे गए.

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लोक आस्था और सूर्योपासना का पर्व छठ की छटा और महत्ता ही कुछ अलग है। इस व्रत का आरंभ महाभारत युग में कुंती द्वारा किए गए सूर्योपासना और कर्ण के जन्म के समय से माना जाता है। मान्यता है कि सूर्यदेव और उनकी बहन छठ मईया को प्रसन्न करने के लिए कुंती ने सूर्यदेव की पूजा की थी जिसके फल स्वरूप उन्हें कर्ण रुपी पुत्र की प्राप्ति हुई थी। प्राचीन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार छठी माता को भगवान सूर्य की बहन माना जाता है। हमारी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छठी मईया संतानों की रक्षा करती है। और उनको दीघार्यु प्रदान करती है इसलिए छठ मईया को प्रसन्न करने के लिए छठ पूजा का उपवास पूर्ण विधि विधान, सात्विकता व स्वच्छता के साथ रखा जाता है।

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