फुलवारीशरीफ(अजीत यादव): पुनर्वास विज्ञान में नूतन शोध और तकनीकी विकास से औटिज़्म समेत अनेक प्रकार की विकलांगता के उपचार और पुनर्वास के कार्यों में संभावनाएँ बढ़ी हैं। पुनर्वास-विज्ञान में शोध की अपार संभावनाएँ भी हैं। आवश्यकता है कि पुनर्वास-कर्मी और प्रशिक्षण-संस्थान शोध के कार्यों पर विशेष बल दें। यह विचार, भारतीय पुनर्वास परिषद के सौजन्य से पटना स्थित इंडियन इंस्टिच्युट औफ़ हेल्थ एडुकेशन ऐंड रिसर्च, बेउर द्वारा, “कौम्यूनिकेशन ऐसेसमेंट ऐंड मैनेजमेंट स्ट्रेटजी फ़ौर ऑटिज़म स्पेक्ट्रम डिज़ौर्डर्स” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार के उद्घाटन-सत्र में पुनर्वास-विशेषज्ञों ने व्यक्त किए।
बेविनार की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक-प्रमुख डा अनिल सुलभ ने कहा कि विकलांगों के पुनर्वास के विविध क्षेत्रों में अत्यंत महत्त्वपूर्ण तकनीकी विकास हुआ है। इस तरह के अंतर्रष्ट्रीय वेबिनार से विश्व के अनेक स्थानों से विशेषज्ञ जुड़ते हैं और इन क्षेत्रों में हुए नूतन शोध और तकनीकी विकास को सबके बीच साझा करते हैं, जिससे समाज के नीचले स्तरों और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य कर रहे पुनर्वास विशेषज्ञों और कर्मियों के कार्यों की गुणवत्ता भी बढ़ती है। डा सुलभ ने आशा व्यक्त की कि संगोष्ठी के विषय पर विद्वान-विशेषज्ञों के परिष्कृत ज्ञान से सभी प्रतिभागी लाभान्वित होंग़।
वेबिनार के प्रथम दिन आज, किंग अब्दुल अज़ीज़ यूनिवर्सिटी, जद्दा (सउदी अरब) में क्लिनिकल साइकोलौजिस्ट डा सराह अज़ीज़ खान, केयर ऐंड स्पेशल एडुकेशन, ओमान में स्पेशल एडूकेटर नौशीन ज़मा, डी आई एम एच वाराणसी के नैदानिक मनो-वैज्ञानिक डा नूर शबीना, डा नीरज कुमार वेदपुरिया तथा डा सना परवीन ने अपने वैज्ञानिक पत्र प्रस्तुत किए। मो समद अंसारी के तकनीकी सहयोग से आयोजित इस वेबिनार का समन्वयन संस्थान के विशेष-शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रो कपिलमुनि दूबे, डा अजय कुमार मिश्र तथा रजनीकांत पाल ने किया। संवाद का संचालन कुमारी मुस्कान ने किया। वेबिनार में अमेरिका, न्यूज़ीलैंड, सउदी अरब, ओमान, दुबई समेत भारत के असम, केरल, छत्तीसगढ़, गोवा, हिमांचल प्रदेश, हरियाणा, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, तमिलनाडू, बंगाल आदि राज्यों के २५० पुनर्वास-विशेषज्ञ वेबिनार में भाग ले रहे हैं।
