एनडीआरएफ ने खूंटी स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के कर्मचारियों को किया प्रशिक्षित

बिहटा(आनंद मोहन): एक और जहां बिहार में उत्पन्न हो रहे बाढ़ की स्थिति को साधने में एनडीआरएफ की बिहार की यूनिट लगातार लगी हुई है और लोगों के बचाव व राहत में जुटी हुई है वहीं दूसरी ओर 9बटालियन की ही झारखंड यूनिट लोगों को प्रशिक्षित करने में भी जुटी है। इसी के तहत आज गुरुवार 24 जून 2021 को 9वीं बटालियन एनडीआरएफ के बचाव कर्मी व प्रशिक्षकों द्वारा खूंटी स्थित आईओसीएल के कर्मियों को किसी भी आपदा में घायल होने की स्थिति में किस प्रकार अपनी और अपने साथियों की जान बचा सकते हैं उन्हें किस प्रकार प्राथमिक उपचार दे कर उनकी मदद कर सकते हैं इसकी ट्रेनिंग दी। प्रशिक्षण कार्यक्रम को आईओसीएल खूंटी टर्मिनल के डीजीएम पल्लव कुमार के अनुरोध पर आयोजित किया गया जिसमें खूंटी टर्मिनल के सभी स्तर के कार्मिकों ने हिस्सा लिया। एनडीआरएफ के प्रशिक्षकों और बचाव कर्मियों की टीम का नेतृत्व करते हुए असिस्टेंट कमांडेंट विनय कुमार ने बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन टर्मिनल जैसे तेलों के भंडारण और वितरण करने वाले उपक्रमों में काम करने वाले कार्मिक सदैव ही खतरों से घिरे रहते हैं। ऐसी स्थिति में उनका हादसों से बचे रहने और हादसे होने पर घायलों को प्राथमिक उपचार देने में सक्षम और निपुण होना अनिवार्य है। इसी उद्देश्य से आज इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को आयोजित किया गया जिसमे उपस्थित लोगों को शरीर से बहते हुए खून को रोकने के तरीके बताए गए, किसी हादसे में घायल हुए साथी को किस प्रकार सुरक्षित निकाला जाय और सुरक्षित और सही तरीके से घटना स्थल से सुरक्षित स्थान तक ले कर जाया जाय इसका प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही किस प्रकार सीपीआर की तकनीक का इस्तेमाल कर के किसी मृत व्यक्ति को पुनर्जीवित किया जा सकता है इसके बारे में भी बताया गया और इसका अभ्यास भी करवाया गया। वारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए स्नेक बाइट मैनेजमेंट अर्थात सर्प दंश के बारे में भी बताया गया कि कैसे पहचाने कि जिस सांप ने डसा है वह जहरीला था या नहीं तथा सांप काटने पर किस प्रकार पीड़ित व्यक्ति को प्राथमिक उपचार दिया जाए। प्रशिक्षण के दौरान सांप डसने को लेकर समाज में व्याप्त कई तरह की भ्रांतियों को भी दूर किया गया और बताया कि सांप काटने का इलाज मात्र चिकित्सीय सहायता ही है कोई भी झाड़ फूंक तंत्र मंत्र से इसका इलाज संभव नहीं है। साथ ही घरों में उपलब्ध चीजों जैसे पानी की बोतल, सूखे नारियल, खाना बनाने में इस्तेमालहोने वाली तसली , तेल के ड्रम, केले के थंब या बांस आदि की मदद से किस प्रकार पानी में तैरने वाले उपकरण बनाए जा सकते हैं और बाढ़ के दौरान या पानी के इलाके में फंसने के उपरांत कैसे इनका इस्तेमाल कर अपनी जान बचाई जा सकती है इसका भी प्रशिक्षण दिया गया.

पूरे प्रशिक्षण सत्र के दौरान सभी उपस्थित कार्मिकों ने बड़ चढ़ कर हिस्सा लिया और बताई गई जीवन रक्षक तकनीकों का अभ्यास भी एनडीआरएफ के बचावकर्मियों व प्रशक्षकों की उपस्थिति में किया।
आईओसीएल खूंटी के महाप्रबंधक श्री पल्लव कुमार और टर्मिनल के प्रबंधक अमित कुमार ने संतोष प्रकट करते हुए कहा कि एनडीआरएफ द्वारा अपने कार्मिकों को प्रशिक्षित करने का उनका प्रयास काफी सफल रहा । लोगों ने बहुत ही उत्साह के साथ इसमें हिस्सा लिया और कई जीवन रक्षक तकनीक सीखे जो इनके जीवन भर काम आयेंगे। उन्होंने एनडीआरएफ की टीम जो कि रांची स्थित ध्रुवा कैंप से आई थी का नेतृत्व करने वाले असिस्टेंट कमांडेंट विनय कुमार एवम् समस्त टीम के सदस्यों का आभार प्रकट किया। विजय सिन्हा, कमाण्‍डेंट, 9वीं बटालियन एनडीआरएफ कहना है कि एनडीआरएफ का उद्देश्य आपदा के समय राहत बचाव करने के साथ साथ आम नागरिकों एवम् खतरनाक माहौल में काम कर रहे कार्मिकों को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में प्रशिक्षित भी करना है ताकि किसी भी आपदा के दौरान लोग अपनी और आस पास के लोगों के मदद कर सकें और जानमाल के नुकसान को रोक सके।