पटना, सुनील कुमार : आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री रत्नेश सादा ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में बनाए जा रहे आश्रय स्थलों का निर्माण ऊंचे स्थानों पर किया जाए, ताकि भविष्य में जलजमाव और अन्य परेशानियों से बचा जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्माणाधीन आश्रय स्थलों की जांच कराने का भी निर्देश दिया।
मंगलवार को पदभार संभालने के बाद आयोजित पहली समीक्षा बैठक में मंत्री सादा ने कहा कि बिहार में बाढ़, सुखाड़, भूकंप, अग्निकांड और आकाशीय बिजली जैसी आपदाएं अक्सर आती हैं। ऐसे में विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ राहत वितरण तक सीमित नहीं, बल्कि मानव जीवन की रक्षा और जवाबदेही तय करना भी है।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में विभाग ने तकनीक का इस्तेमाल कर हजारों लोगों की जान बचाने का काम किया है, जो सराहनीय है। आपदा प्रबंधन की सेवा को वे पूरी संवेदना और कर्तव्यनिष्ठा से निभाएंगे।
बैठक में नवपदस्थापित प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने कहा कि अधिकारियों के अनुभवों का लाभ उठाकर सभी लक्ष्यों को पूरा किया जाएगा। उन्होंने बाढ़, सुखाड़, अग्निकांड और स्थानीय आपदाओं से निपटने के लिए समय से तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया पर जोर दिया। आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए टीम वर्क और जनजागरूकता जरूरी है।
संयुक्त सचिव मो. नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी ने प्रस्तुतीकरण के जरिए बाढ़ प्रभावित जिलों, आबादी, भूकंप, सुखाड़, अग्निकांड, शीतलहर, लू, डूबने से मौत और सर्पदंश जैसी घटनाओं और राहत कार्यों की जानकारी दी।
बैठक में समादेष्टा एसडीआरएफ, संयुक्त सचिव अविनाश कुमार, सहायक निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क समेत विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
