पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) बिहार दिवस 2025 के अंतिम दिन महामहिम राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की गरिमामयी उपस्थिति में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान से किया गया। उसके बाद बिहार राज्यगीत और बिहार गौरवगान की प्रस्तुति की गयी।
महामहिम राज्यपाल ने माननीय शिक्षा मंत्री, अपर मुख्य सचिव तथा अन्य वरीय शिक्षा पदाधिकारीगण को समापन समारोह के अवसर पर बधाई दी। साथ ही उत्सव में शरीक होने की खुशी व्यक्त की। महामहिम राज्यपाल कहा कि भारत की संस्कृति को आकार देने में बिहार की अग्रणी भूमिका रही है। महामहिम ने बिहार की ज्ञान-परम्परा को समृद्ध बताते हुए कहा कि शिक्षकों, गुरुओं का ज्ञान व्यापक है। यहाँ दूसरे देश के लोग अपनी संस्कृति एवं दर्शन का अध्ययन करने आते थे। स्वर्णिम भविष्य के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी होना आवश्यक है। महामहिम ने आशा व्यक्त की कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में बिहार की भूमिका अग्रणी रहेगी।
बिहार के माननीय शिक्षा मंत्री ने देश तथा राज्य से आये हुए सभी कलाकारों एवं आगंतुकों का अभिवादन करते हुए बिहार की गौरवशाली प्रतिमा का स्मरण किया। वर्ष 2010 से बिहार दिवस को जश्न एवं उत्साह के रूप में मनाने की प्रतिबद्धता दोहरायी। बिहार को आर्ट, कल्चर तथा अन्य प्रतिभा का समागम स्थल बताया। साथ ही साथ, शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, कृषि आदि सभी क्षेत्रों में किये गये अद्भुत कार्य जिससे बिहार की तस्वीर तथा लाखों लोगों की तकदीर बदली है, का खास तौर से उल्लेख किया।
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ० एस. सिद्धार्थ ने समापन समारोह के उद्घाटनकर्त्ता महामहिम राज्यपाल, शिक्षा मंत्री, शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों, कर्मचारियों एवं प्रेस प्रतिनिधियों का हार्दिक स्वागत किया। सभी को बधाई एवं शुभकामना दी। बिहार की विरासत, विकास एवं गौरवशाली शिक्षण संस्था प्रणाली की चर्चा की जिसमें विक्रमशिला, नालन्दा विश्वविद्यालय के साथ-साथ वैशाली के लोकतंत्र की बात कही। इसके साथ ही यह शुभकामना भी व्यक्त की कि बिहार अग्रणी राज्य बने।
इसके बाद लेजर शो के माध्यम से बिहार के अतीत. वर्तमान और भविष्य की झलक दिखाई गयी। देश के प्रतिष्ठि एवं मशहूर कलाकार सलमान अली की प्रस्तुति
ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा गाँधी मैदान गूंज उठा। दर्शक बार-बार गाने की फरमाइश करते रहे। कलाकार सलमान अली ने बिहार के दर्शकों को बहुत ही प्यारी ऑडियंस’ कहा। रवीन्द्र भवन में भी सुरेन्द्र शर्मा जैसे राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिप्राप्त हास्यकवि ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल भी भरतनाट्यम एवं शास्त्रीय संगीत का गवाह बना।
पूरे दिन समारोह में बिहार के लगभग सभी विभागों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। शिक्षा विभाग, श्रम विभाग, सूचना एवं जन संपर्क विभाग, जीविका, पर्यटन विभाग, कृषि विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग, कला एवं संस्कृति विभाग आदि का प्रदर्शन सराहनीय रहा।
कलम-किताब से सुसज्जित द्वार दूर से ही शिक्षा विभाग को चिह्नित कर रहा था। शिक्षा विभाग का प्रत्येक स्टॉल अद्भुत, रचनात्मक एवं नवाचारयुक्त था। विज्ञान एवं गणित प्रदर्शनी, TLM स्टॉल, अध्ययन अनुश्रवण कोषांग स्टॉल, अप्पन बिहार निपुण बिहार, बाल वाटिका, वर्चुअल सेल्फी केन्द्र, कला गतिविधि, मिट्टी कला कक्ष, क्ले आर्ट, गणित एवं विज्ञान मंच ने श्रेष्ठ प्रदर्शन किया। बिहार राज्य पाठ्य पुस्तक प्रकाशन निगम लिमिटेड एवं राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद्, पटना द्वारा निर्मित लघु फिल्म “किताबें कैसे बनती हैं?” दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र बनी रहीं। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल पर 3D के माध्यम से लोगों ने बिहार के गौरवपूर्ण अतीत के साथ नये बिहार की झलक भी देखी। पर्यटन विभाग पलेलियन में बिहार के सांस्कृतिक धरोहरों, पर्यटन स्थलों और समृद्ध परंपराओं की झलक दिखी। आपदा प्रबंधन विभाग ने पपेट शो के माध्यम से लू से बचाव, उनका (वज्रपात) से बचाव, अगलगी से बचाव तथा भूकम्प से बचाव पर नाट्य प्रस्तुति द्वारा लोगों को जागरूक किया। समारोह के अंतिम दिन विभिन्न विद्यालयों से बच्चे अपने अपने शिक्षकों के साथ बिहार दिवस कार्यक्रम देखने आये।
कार्यक्रम में लोगों की सुरक्षा व भीड़ नियंत्रण के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहे। स्थायी एवं अस्थायी सी.सी.टी.वी. कैमरे से पूरी गतिविधि पर नज़र रखी जा रही थी।बिहार दिवस के समारोह ने राज्य की सांस्कृतिक विरासत एवं एकता को प्रदर्शित किया जिससे लोगों में गर्व और उत्साह की भावना जागृत हुई।
