पैलिएटिव केयर पर कार्यशाला व सम्मेलन से गरीब मरीजो को होगा फायदा

फुलवारीशरीफ(अजित यादव): पटना एम्स के एनेस्थेसिया विभाग द्वारा आयोजित पैलिएटिव केयर पर कार्यशाला 28 वीं अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडियन एसोसिएशन ऑफ पेलियेटिव केयर के तत्वाधान में किया गया. एम्स पटना के डीन और एनेस्थेसिया विभाग हेड डॉ उमेश भदानी ने बताया कि 19 मार्च से 21 मार्च तक ऑनलाइन माध्यम से नर्सों के लिए कार्यशाला का आयोजन आईजीआईएमएस पटना में किया गया । इसमे 85 नर्सों ने प्रशामक देखभाल ( पैलिएटिव केयर ) का प्रशिक्षण प्राप्त किया । वहीं डॉक्टरों की कार्यशाला आज एम्स पटना में आयोजित की गई है और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए कार्यशाला का आयोजन महावीर कैंसर संस्थान में रविवार को किया जाएगा। आयोजन सचिव डॉ उमेश कुमार भदानी, डीन एम्स पटना ने बताया कि सम्मेलन का उद्घाटन एम्स, पटना के निदेशक डॉ प्रभात कुमार सिंह ने किया। डॉ चांदनी सिन्हा, सचिव, कमेटी, वैज्ञानिक समिति आईएपीकोन 2021, के अनुसार कुल 470 प्रतिनिधियों ने 37 पंजीकरणों के साथ आभासी सम्मेलन के लिए पंजीकरण किया है। सम्मेलन में 92 पोस्टर प्रस्तुतियाँ और 6 पेपर प्रस्तुतियाँ हुई । कार्यक्रम में डॉ एनआर विश्वास और और दिल्ली एम्स के कई संकाय से लोग जुड़े थे.

डॉ उमेश भदानी ने कहा कि मृत्यु जीवन का सच है. इंसान कैसा भी हो जब वो अपने जीवन के अंतिम समय में पहुंचता है, तो उसकी एक इच्छा जरूर होती है कि उसकी मौत शांतिपूर्ण हो। खास कर के तब जब व्यक्ति ये जानता हो कि उसकी बीमारी अब लाइलाज है और मृत्यु ही उसकी नियति है । पल पल कर अपनी मौत की तरफ बढ़ते उस व्यक्ति को अगर कोई ये कहे कि उसकी न टलने वाली मौत में उसका दर्द कम होगा तो मरीज और उसके परिवार वालों को थोड़ी राहत जरूर मिल जाती है जो अंतहीन दर्द को झेल रहे होते हैं। ऐसे ही मरीजो के लिए पैलिएटिव केयर किया जाता है । डॉ भदानी ने कहा कि बिहार में अधिकाकांश गरीब अशिक्षित मरीजो और उनके परिजनों को इस पद्धति का लाभ जानकारी के अभाव में नही मिल पाता है। यह कांफ्रेंस और कार्यशाला से गरीब मरीजो को काफी फायदा होगा. इसमे चिकित्सको नर्सो सोशल वर्करों को दर्द निवारक देखभाल में दर्द से राहत, लक्षण नियंत्रण, मनोसामाजिक सहायता और परिवार के समर्थन के साथ बुरे समय में रोगियों की मदद के बारे में जागरूक किया गया।