बिहार

तीन बार जांच, तीन बार नापी : फिर भी अतिक्रमण कब्जा बरकरार अचंलाधिकारी से दलित-महादलित समाज को न्याय क़ी आस टूटी

फुलवारी शरीफ, (न्यूज़ क्राइम 24) पटना जिला के संपतचक प्रखंड अंतर्गत भोगीपुर गाँव के महादलित टोला के पास सरकारी रास्ते पर अतिक्रमण का मामला प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत का शर्मनाक उदाहरण बन गया है. दलित-महादलित समाज के महिलाओ व पुरूषो के लिखित शिकायत पर अगस्त 2022 से लेकर अब तक तीन बार अंचल अमीन से नापी के बाद अतिक्रमण प्रमाणित पाया गया, बावजूद इसके आज तक अवैध कब्जा पूरी तरह नहीं हटाया गया. 22 मई गुरुवार को न्यायालय के आदेश पर अंतर अधिकारी संपतचक राजस्व पदाधिकारी स्वाती झा दलबल और तामझाम के साथ जेसीबी मशीन लेकर अतिक्रमण हटाने पहुंचे तो महा दलितों में उम्मीद जगी लेकिन कुछ पलों में महादलित को न्याय कि आस टूट गए. अधिकारियों ने वहां अतिक्रमण जमाए हुए पक्ष कांतेश रंजन से बातचीत और सुलह समझौता चाय पानी करते हुए केवल गेट को हटाकर अतिक्रमण हटाने की खाना पूर्ति करते हैं वापस लौट गए. इससे महा दलित समुदाय के लोगों में गहरी नाराजगी है.

बता दें क़ी संपतचक प्रखंड के भोगीपुर गांव में महा दलित बस्ती के आने जाने के रास्ते को स्थानीय दबँग द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है. उसे रास्ते को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाया गया.पहली बार तत्कालीन अंचलाधिकारी नन्द किशोर निराला ने सख्त रुख अपनाया था और अतिक्रमण रोका गया था. परन्तु डीसीएलआर मैत्री सिंह के ज्वाइन करते ही अतिक्रमणकारी निश्चिंत होकर कंक्रीट का पीलर, बीम और लोहे का गेट लगाकर रास्ता पूरी तरह कब्जा लिए.ग्रामीणों का आरोप है कि डीसीएलआर की गाड़ी और सुरक्षा गार्ड तक अतिक्रमण स्थल पर नियमित मौजूद रहे. यहां गौर करने वाली बात है क़ी अतिक्रमणकारियों कांटेश रंजन से तत्कालीन डीसीएलआर मैत्री सिंह के रिश्तेदारी है.

24 अगस्त 2024 को पुनः शिकायत के बाद प्रभारी अंचलाधिकारी स्वाति झा ने अतिक्रमण हटाने की तारीख 22 जनवरी 2025 तय की थी, लेकिन पूरी कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रही।

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जब तीसरी बार ग्रामीणों ने पुनः लिखित शिकायत कर प्रयास शुरू किया तो 22 मई 2025 की तिथि तय हुई, पत्रांक-944, दिनांक-8 मई 2025 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी को आवश्यक बल उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया। आज दोपहर काफी ताम झाम के साथ जेसीबी मशीन के साथ टीम जरुर पहुंची, परंतु वहां अतिक्रमण हटाने की बजाय खाना पूर्ति कर चले गए. ग्रामीणों के अनुसार वर्तमान अंचलाधिकारी का अतिक्रमणकारी से घनिष्ठ संबंध सर्वविदित है और उन्हीं के घर बैठकी व चाय-पानी भी होता है जबकि ये लोग कई अपराधिक मामलो मे संलिप्त हैं और हाल ही मे जेल से निकले है.लोगो ने अतिक्रमण हटाने के जगह अचंलाधिकारी संपतचक प्रखंड तनाव फलाने और विवाद बढाने का भी आरोप लगाया.

इस मामले में संपतचक अंचल अधिकारी ने बताया कि गेट को हटाकर अतिक्रमण मुक्त किया गया है रास्ता को, अगर दोबारा वहां गेट लगाया जाता है जाती क्रमण किया जाता है तो पुलिस प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा.

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