फुलवारी शरीफ, अजित। कश्मीर की -8 डिग्री की सर्दी और यूपी की उमेश भरी भरी गर्मी के बीच शूटिंग किया गया. एक फौजी की नौकरी मैं सरहद की सुरक्षा और परिवार की देखभाल दोनों किस तरह से जंग के बीच एक दूसरी जंग लड़ने जैसी होती है. इस फिल्म के माध्यम से एक फौजी की कहानी को उसके दर्द को पर्दे पर आम लोगों के बीच ले जाने की हमारी पूरी कोशिश रही है. फिल्म रंग दे बसंती बिल्कुल साफ सुथरा और समाज परिवार के साथ बैठकर देखने की वाली फिल्म है. इस फिल्म को उन्होंने अपनी बेटी और बेटा के साथ देखा है. आम लोगों से आग्रह किया कि एक बार सिनेमाघर में आए और इस फिल्म को पूरे परिवार के साथ देखने का लुत्फ़ उठाएं ताकि भोजपुरी सिनेमा एक बार फिर से सिनेमाघर की शान बनकर सामने आए. प्रमोशन के दौरान उन्होंने फिल्म के गाने भी गूनंगुनाये और लोगों के सवालों का जवाब दिया.
मीडिया के कई सवालों का जवाब देते हुए खेसारी ने कहा कि उन्हें राजनीति में आने का कोई चॉइस नहीं है और सिनेमा की बेहतरी के लिए वह दूसरे फील्ड में ना जाकर इसी फील्ड में रहकर सिनेमा की बेहतरी के लिए काम करते रहना चाहते हैं.भोजपुरी स्टार खेसारी लाल ने कहा कि किसी भी चीज को सुधारना होता है तो उसी विधा में रहकर आदमी को काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भोजपुरी की बेहतरी के लिए आपको मनोज तिवारी दिनेश लाल निरहुआ रवि किशन से बात करनी चाहिए उनसे सवाल पूछना चाहिए।
राजनीति में आने की उनकी कोई ख्वाहिश नहीं है. सिनेमा की बेहतरी के लिए कोई जरूरी नहीं कि वह राजनीति में आए तभी सिनेमा की बेहतरी हो सकती है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उनका बेटा बेटी किस क्षेत्र में जाएगा पढ़ाई लिखाई करके इस पर वह जवाब नहीं बनना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि उनके पिता तो भैंस चराने वाले थे घास काटने वाले थे, चाहते थे कि उनका बेटा खेसारी दर्जी का काम सिख करके कोई टेलरिंग का दुकान खोले।
खेसारी ने कहा की 6 महीने तक वह टेलरिंग का काम भी सीखा है लेकिन उनका किस्मत ने भोजपुरी सिनेमा का सितारा बना दिया. इसलिए जरूरी नहीं की जो बाप जिस क्षेत्र में है उसका बेटा भी उसी क्षेत्र में जाएगा. अपने कर्म पर विश्वास रखिए अपना काम कीजिए और काम करते रहिए आपकी किस्मत एक दिन जरूर आपका साथ देगी.
फुलवारी शरीफ शहीद भगत चौक का सिटी कार्ड के बाहर अंदर ग्राहकों की भारी भीड़ खेसारी लाल यादव के झलक पाने के लिए बेताब थी. प्रमोशन कार्यक्रम की समाप्ति के बाद जब बाहर निकले तो हजारों की भीड़ को देखकर उनका अभिवादन स्वीकार किया और कुछ गाने भी गुनगुनाते हुए सभी लोगों से फिल्म रंग दे बसंती देखने के लिए सिनेमा घरों में आने का आग्रह किया।
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