‘बदलाव की चाहत’ नाटक में लोगों को जीवन जीने के बारे में किया गया जागरूक

फुलवारीशरीफ(अजित यादव): सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच(एस. एस. एम.) की साप्ताहिक नुक्कड़ नाटक श्रृंखला में महेश चौधरी के द्वारा लिखित एवं निर्देशित “बदलाव की चाहत” की प्रस्तुति वाल्मी, फुलवारीशरीफ में की गई। नाटक की शुरुआत सौरभ राज के स्वरबध्द गीत- सपने बहुत हैं दिल में लेकिन सुबह उठने की हिम्मत नहीं, पाना पूरी दुनिया है पर अपनी नींद से लड़ सकते नहीं….से की गई.

नाटक के माध्यम से यह दिखाया गया कि बिस्तर में सोए- सोए यदि नींद की झोंके लेते रहेंगे तो यह ज़िंदगी भी ऐसे ही झोंको की तरह बन जाएगी लेकिन यदि वाकई में आप अपनी जिंदगी में कुछ करना चाहते हैं तो अपने बिस्तर से उठे और अपनी मोटिवेशन की आग को अपने अंदर से बाहर निकाले। ये आग आपको उठा सकती है लेकिन आगे बढ़ने के लिए आपको अपने कदम बढ़ानी होगी। जिस तरह गाड़ी में पेट्रोल होने से गाड़ी अपने आप चलने नहीं लगती बल्कि उस गाड़ी को खुद से चलाना होता है.

सबसे बड़ी बीमारी यह है कि मैं कल से कर लूंगा और अपनी जिंदगी बदल लूंगा यह आगे बढ़ने में बाधक है। जिंदगी में यदि बदलाव लाना है तो अपने आप को बदलना होगा। सिर्फ बोल देने भर से सपने पूरे नहीं होते उसके लिए मेहनत करना पड़ता है। बिस्तर से सुबह उठने की हिम्मत कीजिए फिर व्यायाम करें और देखें कि दिन भर का कौन-कौन सा काम है उसे टास्क के रूप में लीजिए और समय पर पूरा कीजिए। यदि स्कूल में है तो टॉपर बनने के बारे में सोचे यदि कंपटीशन एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं तो जल्दी से जल्दी सलेक्शन लेने के बारे में सोचें। म्यूजिक, डांस पसंद है तो देखे कितनी जल्दी से उसे सीख सकते हैं और एक्टर बनना चाहते हैं तो जल्दी से जल्दी एक्टर बन कर दिखाएं, जितनी जल्दी हो सकता है उतनी जल्दी अपने टारगेट को पूरा कीजिए। सिर्फ सोए रहकर अपना समय बर्बाद ना करें। आप जिस काम में लगे हैं उसके लिए आपके परिवार में आपकी सफलता की सपना देख रहे होते हैं इसलिए आप अपनी जिम्मेवारी को ईमानदारी से निभाईए ताकि उसका रिजल्ट अच्छा मिले. नाटक के कलाकार महेश चौधरी, मोनिका राज, सौरभ राज,अमन, नमन, करण, प्रमोद, यश, शांभवी, प्रीति, वीर, वैभव, गोविंद, कामेश्वर प्रसाद, जगत नारायण भट्ट थे।