10 कट्ठा पर जबरन कब्जा जमाए हुए था अख्तर मुखिया , जमीन मालिक ने परेशान होकर दो लाख की सुपारी देकर करा दी हत्या!

 10 कट्ठा पर जबरन कब्जा जमाए हुए था अख्तर मुखिया , जमीन मालिक ने परेशान होकर दो लाख की सुपारी देकर करा दी हत्या!

पटना/पटनासिटी(अजीत यादव): राजधानी पटना के चर्चित अख्तर मुखिया और अख्तर इमाम और एलीफेंट मैन की गोलियों से छलनी कर हत्या मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार शूटर और सुपारी देने वाले ने पुलिस के सामने ये खुलासा किया है कि अख्तर मुखिया सुपारी देने वाले मोहम्मद खुर्शीद उर्फ ढनढन के बेटे मो सज्जू उर्फ शहजादा के 10 कट्ठे के प्लॉट पर जबरदस्ती कब्जा जमाए हुए था। अख्तर मुखिया की हत्या का सुपारी देने वाला सज्जू उर्फ शहजादा के पिता मो खुर्शीद उर्फ ढनढन बिहार पुलिस से रिटायर सिपाही हैं।

पुलिस को पूछताछ में सुपारी देने वाले मोहम्मद सज्जू ने बताया है कि अख्तर मुखिया से उन लोगों ने पहले 15 कट्ठा जमीन बेचा था उसके बावजूद 10 कट्ठा जमीन बचा हुआ था उस पर भी अख्तर मुखिया अपना कब्जा किए रहा । इसके बारे में लाख मनाने और समझाने के बावजूद अख्तर मुखिया 10 कट्ठा जमीन पर कब्जा नहीं छोड़ रहा था । इससे परेशान होकर मो सज्जू उर्फ शहजादा पिता मोहम्मद खुर्शीद उर्फ ढनढन निवासी मीर शिकार टोली गली आलमगंज पटना सिटी ने पेशेवर सुपारी किलर को ₹2 लाख का सुपारी देकर अख्तर मुखिया की हत्या करा दी । पुलिस ने सुपारी देने वाले मोहम्मद छज्जू उर्फ शहजादा के साथ ही एक शूटर खाजेकला का सदर गली निवासी मोहम्मद सोनू सैफु द्दीन को गिरफ्तार कर लिया हैंम अब पुलिस इन दोनों से पूछताछ कर हत्याकांड में शामिल फरार दो अन्य शूटरों की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

करोड़ो की राशि हाथियों के नाम कर देने के बाद सुर्खियों में आया था अख्तर मुखिया-

अख्तर इमाम वर्षो पूर्व मुखिया चुनाव लड़ा था जिसमे उसे शिकस्त खाना पड़ गया था। हालांकि मुखिया चुनाव हारने के बावजूद अख्तर इमाम, अख्तर मुखिया के नाम से प्रसिद्ध हो गया था। अख्तर इमाम ने जानीपुर के मुर्गियाचक में छोटा सा मिनी जंगल जिम कार्बेट नेशनल पार्क बनाकर हाथी घोड़ा , ऊंट ,अजगर सांप समेत कई जानवरों को पाल रखा था। मुख्य रूप से अख्तर मुखिया हाथियों के संरक्षण के लिए पूरे राज्य में मशहूर था। बिहार के अलावा देश के कई पर्यटक स्थलों पर विदेशी पर्यटकों के साथ हाथियों को लेकर अक्सर घूमने जाया करता था। फुलवारी शरीफ जानीपुर और आसपास के इलाके में वर्षों से हाथियों के साथ घूमना उसका शगल था। हाथियों के साथ अख्तर मुखिया को घूमता देखकर इलाके के बच्चे उनके पीछे दौड़ पड़ते और हाथी काका के नाम से उन्हें बुलाते थे। इन सबके बीच अख्तर मुखिया की पत्नी ,दो बेटे,एक बेटी और ससुराल के अन्य लोगों से उसका हाथी प्रेम के चलते मनमुटाव रहने लगा था। कई वर्षों से अख्तर मुखिया अपने फुलवारी शरीफ के ख़लीलपूरा वाले घर को छोड़ मुर्गियाचक जानवरों के साथ में ही बाँसवारी के पास बड़ा ऊँचा हाथी दलान बनाकर रह रहा था। अक्सर अख्तर मुखिया फुलवारीशरीफ से टमटम पड़ाव के पास चाय नाश्ता करने भी आया जाया करता था । टमटम पड़ाव के पास बाबा मखदूम के मजार के पास भी उसके साथी संघत के लोग साथ साथ घंटो बिताते थे।

अख्तर का बड़ा बेटा मेराज अपनी प्रेमिका के साथ पिता पर गलत काम करने का आरोप लगाकर पारिवारिक विवाद को सड़क पर उछाला था।इसके अलावा बेटे मेराज पर अख्तर मुखिया ने जानलेवा हमला करने की प्रथमिकी दर्ज कराई थी। इन सब झंझटों के बाद अख्तर ने अपनी करोड़ो की राशि और सम्पत्ति (करीब पांच करोड़) को हाथियों के नाम करते हुए बजाप्ता एलान किया था कि उसके बेटों को उसकी सम्पत्ति तब ही मिलेगी जब उसके मौत के बाद हाथियों और अन्य जानवरों का संरक्षण करेंगे। इसके अलावा अख्तर ने अपनी पत्नी के नाम शेष सम्पत्ति और राशी भी कर दिया था ताकि उसकी बीबी को उसकी मौत के बाद जीवन यापन करने में दिक्कतें नही आये। हालांकि हाथी प्रेम के बावजूद अख्तर मुखिया का जमीन के धंधे से करोड़ो कमाई का प्रेम नही छूट रहा था। कई जमीन कारोबार वालो से उसने पंगा ले रखा था। और आखिरकार जमीन के विबाद में ही अख्तर मुखिया की हत्या हो गयी।

न्यूज़ क्राइम 24 संवाददाता

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