पटना, विक्रम कुमार : कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने गुरुवार को मीठापुर स्थित कृषि भवन में डिजिटल कृषि निदेशालय का उद्घाटन किया है। उनके द्वारा इस मौके पर 12 राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्रों (भभुआ, धनरुआ, नवादा खिरियावी, सिपाया, पिपराकोठी, पूसा, हलसी, सिकन्दरा, ओडेहारा, कुमारखण्ड एवं बुआलदह) में मॉडल कस्टम हायरिंग सेंटर और 25 जिलों के 32 अनुमंडलों में अनुमंडल स्तरीय मिट्टी जांच प्रयोगशाला का भी उद्घाटन किया गया।
इस अवसर पर कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि डिजिटल कृषि निदेशालय का गठन होने और अब इसके उद्घाटन के बाद राज्य की कृषि के क्षेत्र में डिजिटल तकनीक को बढ़ावा मिलेगा। कृषि के क्षेत्र में डेटा आधारित खेती मील का पत्थर साबित होगी। किसानों को रियल टाइम में विभाग की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में इससे मदद मिलेगी। डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर मौसमवार एवं फसलवार आच्छादन, उत्पादन और उत्पादकता का पूर्वानुमान करना अब इससे आसान होगा। किसान आधारित सेवाओं में नवाचार लाने तथा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए एकीकृत डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली विकसित करने के लिए डिजिटल कृषि निदेशालय की स्थापना की गई है।
उन्होंने कहा कि यह निदेशालय कृषि क्षेत्र में तकनीकी बदलाव और पारदर्शिता लाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से किसानों के लिए डिजिटल सॉइल हेल्थ कार्ड, पौधा संरक्षण कार्यों में ड्रोन तकनीक का उपयोग, तथा डिजिटल जनरल क्रॉप एस्टीमेशन सर्वे के तहत प्रत्येक फसल मौसम में फसल कटनी प्रयोगों का संचालन और आंकड़ों का संग्रहण किया जाएगा। इसके साथ ही, डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी यह निदेशालय तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।
कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा केन्द्र प्रायोजित सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मेकेनाइजेशन योजना अंतर्गत 12 जिलों के बीज गुणन प्रक्षेत्र में मॉडल कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना की गई है। मॉडल कस्टम हायरिंग सेंटर में संबंधित जिलों के अनुसार 25 प्रकार के उपयोगी कृषि यंत्रों को उपलब्ध कराया गया है।उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से न केवल प्रक्षेत्रों में गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन होगा बल्कि आस-पास के गांवों में फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में भी बढ़ोतरी होगी। वहीं 25 जिलों के 32 अनुमंडलों में अनुमंडल स्तरीय मिट्टी जांच प्रयोगशाला की स्थापना वित्तीय वर्ष 2025-26 में की गई है। इसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग में कमी लाना, मिट्टी को स्वस्थ रखना तथा कृषकों के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि लाना है।
