बिहार

छह महीने से थाना में धूल खा रही बरामद बाइक, पीड़ित ने उठाए पुलिस कार्यशैली पर सवाल

पटना, अजित। फुलवारी शरीफ थाना क्षेत्र के संगत पर, मुख्य मार्ग जोगिया टोली के सामने रहने वाले संजय पासवान की मोटरसाइकिल (नंबर BR1 AJ 7877) चोरी होने के बाद बरामद तो हो गई, लेकिन छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक उन्हें वापस नहीं मिल सकी है. इसको लेकर पीड़ित ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. संजय पासवान का कहना है कि यह आलमगीर के नाम से मोटरसाइकिल है जिसे उन्होंने खरीदा था लेकिन ट्रांसफर नहीं हुआ था: मोटरसाइकिल खरीद का एक अलग से कागज भी बना लिया गया था।

पीड़ित संजय पासवान ने बताया कि उनकी मोटरसाइकिल चोरी हो गई थी, जिसकी सूचना उन्होंने फुलवारी शरीफ थाना में दी थी. बाद में उन्होंने स्वयं प्रयास कर मोटरसाइकिल का पता लगाया और इसकी जानकारी पुलिस को दी. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बाइक बरामद कर ली और एक चोर गिरोह को भी पकड़ा, जो कई जगहों पर चोरी की घटनाओं में संलिप्त बताया जा रहा है। हालांकि, बरामदगी के बाद से ही मोटरसाइकिल थाना परिसर में ही खड़ी है. संजय पासवान का कहना है कि बार-बार थाना जाने के बावजूद उन्हें सिर्फ यही जवाब मिलता है कि “अनुसंधान चल रहा है”, “सुपरविजन होगा”, और “कार्रवाई पूरी होने के बाद कोर्ट से गाड़ी रिलीज होगी.” लेकिन गाड़ी कब मिलेगी, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है।

पीड़ित ने सवाल उठाया कि आखिर कैसी प्रक्रिया है, जिसमें बरामद वाहन को उसके मालिक को लौटाने में छह महीने से ज्यादा का समय लग रहा है. उन्होंने कहा कि उनकी बाइक थाना में धूल खा रही है और खराब होने की स्थिति में पहुंच रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कोई ठोस जवाब नहीं दे रहे हैं। यह मामला फुलवारी शरीफ पुलिस की अनुसंधान प्रक्रिया और कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है. स्थानीय लोगों का भी कहना है कि बरामद वाहनों को समय पर मालिकों को नहीं सौंपा जाना एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जिससे आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है.
फुलवारी शरीफ थाना क्षेत्र में चोरी के बाद बरामद की गई एक मोटरसाइकिल को लेकर अब पुलिस और वाहन मालिक के बीच प्रक्रिया को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. करीब छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बाइक थाना परिसर में ही खड़ी है, जिससे पीड़ित परेशान है.

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इस संबंध में फुलवारी शरीफ थाना के एडिशनल एसएचओ दिवाकर कुमार का कहना है कि वाहन मालिक कोर्ट से रिलीज ऑर्डर लेकर थाना आएंगे, तभी गाड़ी उन्हें सौंपी जा सकती है. उन्होंने बताया कि अब तक इस मामले में कोर्ट से कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए वाहन रिलीज नहीं किया जा सकता है।

वहीं दूसरी ओर गाड़ी मालिक का आरोप है कि कोर्ट से आदेश प्राप्त करने के लिए थाना की ओर से जो आवश्यक दस्तावेज भेजे जाने चाहिए, वे अब तक नहीं भेजे गए हैं. इसी कारण कोर्ट से गाड़ी छोड़ने संबंधी आदेश नहीं मिल पा रहा है. उनका कहना है कि वे लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन पुलिस प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण मामला अटका हुआ है.

इस पूरे मामले में गाड़ी मालिक और पुलिस के बीच तालमेल की कमी साफ नजर आ रही है, जिसका खामियाजा आम व्यक्ति को भुगतना पड़ रहा है. एक तरफ पुलिस कोर्ट आदेश का हवाला दे रही है, तो दूसरी तरफ पीड़ित आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं होने की बात कह रहा है। सबसे अहम सवाल यह उठता है कि चोरी के बाद बरामद हुआ वाहन आखिर कब तक थाना में ही खड़ा रहेगा. इतने लंबे समय तक वाहन का उपयोग नहीं होने से उसके खराब होने की आशंका भी बढ़ती जा रही है. यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा कर रहा है, जिस पर संबंधित अधिकारियों को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा इस मामले में क्या पहल की जाती है और पीड़ित को उसकी मोटरसाइकिल कब तक वापस मिल पाती है।

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