पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) सोमवार, दिनांक 05.01.2026ः जिलाधिकारी, पटना डॉ. त्यागराजन एस.एम. द्वारा लोक शिकायत निवारण एवं आरटीपीएस से संबंधित मामलों की समीक्षा की गयी। सभी लोक प्राधिकारों एवं अधिकारियों को आवेदनों का त्वरित गति से गुणवत्तापूर्ण निष्पादन करने का निदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त परिवादों का निर्धारित समयावधि में निष्पादन तथा पारित आदेशों का अक्षरशः क्रियान्वयन अनिवार्य है। साथ ही बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम (आरटीपीएस) के अंतर्गत तय समय-सीमा के अंदर नागरिकों को सेवा प्रदान करना आवश्यक है। इन मानकों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधित पदाधिकारी इसका हर हाल में पालन सुनिश्चित करेंगे।
जिलाधिकारी ने कहा कि बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त परिवादों के सिर्फ निष्पादन से काम नहीं चलेगा। शिकायतों का निवारण अपरिहार्य है तथा जनता की संतुष्टि अनिवार्य है। पदाधिकारीगण इसे विशेष रुचि लेकर सुनिश्चित करें।
जिलाधिकारी ने कहा कि आरटीपीएस के मामलों में जिन-जिन अंचलों/प्रखंडों में शिथिलता बरती जाएगी वहाँ संबंधित अपीलीय प्राधिकार अनुमंडल पदाधिकारी नियमित रूप से समीक्षा करते हुए मामलों की स्वतः सुनवाई करेंगे तथा लापरवाह अधिकारियों के विरूद्ध नियमानुसार दंड अध्यारोपित करेंगे। यही नियम लोक शिकायत निवारण के मामलों में भी लागू होगा।
समीक्षा में पाया गया कि जिला में लोक शिकायत निवारण में विगत एक सप्ताह में 206 मामलों को निष्पादित किया गया है। कोई भी आवेदन एक्सपायर्ड नहीं है। जिलाधिकारी द्वारा इसकी सराहना की गई। उन्होंने कहा कि सभी आवेदनों का निष्पादन निर्धारित समय अवधि के अंदर किया जा रहा है। 60 (साठ) कार्य दिवस से अधिक एक भी मामले लंबित नहीं है। इसके लिए पदाधिकारीगण प्रशंसा के पात्र हैं। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि हमेशा यह सुनिश्चित करें कि एक भी आवेदन एक्सपायर्ड न हो। सभी आवेदनों का निष्पादन समय-सीमा के अंदर करें। समीक्षा में पाया गया कि विगत 30 कार्य दिवस से अधिक निष्पादन हेतु प्रक्रियाधीन मामलों की संख्या 421 है तथा विगत 45 कार्य दिवस से अधिक निष्पादन हेतु प्रक्रियाधीन मामलों की संख्या 402 है। 60 (साठ) कार्य दिवस से अधिक एक भी मामले लंबित नहीं है। समय-सीमा के अंदर निष्पादन हेतु प्रक्रियाधीन परिवादों की कुल संख्या 2,211 है।जिलाधिकारी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को इन सभी मामलों को निर्धारित समय सीमा के अंदर गुणवत्तापूर्ण ढंग से निष्पादित करने का निदेश दिया।
लोक शिकायत निवारण के अपीलीय मामलों की समीक्षा में पाया गया कि प्रथम अपील के लिए दायर 11,729 मामलों में 11,493 मामलों को निष्पादित कर दिया गया है। शेष का निष्पादन भी निर्धारित समय-सीमा के अंदर तीव्र गति से किया जा रहा है। जिलाधिकारी द्वारा संबंधित पदाधिकारियों को इसे तय समय के अंदर निष्पादित करने का निदेश दिया गया। 60 कार्य दिवस से कम 236 मामले निष्पादन हेतु प्रक्रियाधीन है। 60 कार्य दिवस से अधिक एक भी मामले लंबित नहीं है। द्वितीय अपील के लिए दायर 4,467 मामलों में 4,286 मामलों को निष्पादित किया गया है। शेष मामले भी निर्धारित समय-सीमा के अंदर निष्पादन हेतु प्रक्रियाधीन है।
जिलाधिकारी ने कहा कि लोक शिकायत निवारण के 118 मामलों में लोक प्राधिकारों के विरुद्ध आर्थिक दण्ड लगाया गया है जिसमें 3,28,300 रूपये की राशि दण्ड स्वरूप अध्यारोपित है। इसमें 2,82,900 रुपये की राशि जमा कर दी गई है। 25 मामलों में अनुशासनिक कार्रवाई हेतु अनुशंसा की गई है। जिलाधिकारी ने कहा कि जिन-जिन अधिकारियों पर दंड लगाया गया है वे अविलंब दंड की लंबित राशि जमा कर दें अन्यथा उनके वेतन से कटौती की जाएगी। उन्होंने जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को इस संबंध में संबंधित जिला-स्तरीय विभागीय पदाधिकारियों से सम्पर्क करते हुए पूर्ण विवरणी तैयार कर कोषागार पदाधिकारी को पत्र देने का निदेश दिया। उन्होंने यह भी निदेश दिया कि संबंधित पदाधिकारी द्वारा दंड की राशि जमा करने का यदि साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो उनका वेतन निकासी अवरूद्ध करने की कार्रवाई की जाए।
समीक्षा में यह भी पाया गया कि लोक शिकायत निवारण के विगत 490 सुनवाइयों में शत-प्रतिशत मामलों में लोक प्राधिकार उपस्थित रहे हैं। उन्होंने इस पर हर्ष व्यक्त करते हुए भविष्य में भी सुनवाई में उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने का निदेश दिया।
बैठक में अंचलाधिकारियों एवं थानाध्यक्षों की संयुक्त बैठक की समीक्षा की गई। इसमें पाया गया कि 23 अंचलों में संयुक्त बैठक के कुल 13,107 कार्यवाही को अपलोड किया गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि संयुक्त शनिवारीय बैठक का भूमि विवादों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निदेश दिया कि नियमित तौर पर अंचलाधिकारी एवं थानाध्यक्ष का हरएक शनिवार को संयुक्त शनिवारीय बैठक आयोजित हो। साथ ही इसे भू-समाधान पोर्टल पर भी अपलोड किया जाए।
बैठक में आरटीपीएस में प्रगति की समीक्षा की गई। इसमें पाया गया कि कुल एक्सपायर्ड मामलों की संख्या 5 है। दानापुर में पेंशन के 2 मामले एवं श्रमिक दुर्घटना योजना के 1 मामला; बेलछी में श्रमिक दुर्घटना योजना के 1 मामला तथा दनियावाँ में श्रमिक दुर्घटना योजना के 1 मामला एक्सपायर्ड है। जिलाधिकारी ने इस पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए इन आवेदनों को अविलंब नियमानुसार निष्पादित करने का निदेश दिया। जिन मामलों में तकनीकी समस्याओं के कारण ऑनलाइन निष्पादन प्रदर्शित नहीं हो रहा है उन मामलों में विभाग से समन्वय कर ऑनलाइन एक्सपायरी की संख्या नियमानुसार शून्य करने का निदेश दिया गया।
जिलाधिकारी ने निदेश दिया कि संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रांतर्गत सभी प्रखंडों में आरटीपीएस के तहत मामलों के निष्पादन की समीक्षा करें। जिन पदाधिकारियों द्वारा समय-सीमा के अंदर आवेदनों का निष्पादन नहीं किया जा रहा है वैसे पदाधिकारी के विरूद्ध हर एक एक्सपायर्ड आवेदन पर विधिवत दंड लगाते हुए संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी तीन दिन के अंदर प्रतिवेदन देंगे। जिलाधिकारी ने कहा कि एक्सपायर्ड मामलों की संख्या हर हाल में शून्य रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आरटीपीएस अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप समय-सीमा के अंदर आवेदनों का गुणवत्तापूर्ण निष्पादन सुनिश्चित करें। आम जनता को सेवा प्रदान करने में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी द्वारा अनुमंडल पदाधिकारियों को आरटीपीएस के तहत राशन कार्ड से संबंधित मामलों का त्वरित गति से निष्पादन करने का निदेश दिया गया। नए राशन कार्ड निर्माण हेतु प्राप्त आवेदनों का त्वरित गति से निष्पादन सुनिश्चित करने तथा इसे कैम्प लगाकर वितरण करने हेतु निर्देशित किया गया। साथ ही नए राशन कार्डधारियों को समय से खाद्यान्न आपूर्ति सुनिश्चित करने का निदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि विधि-व्यवस्था संधारण के साथ खाद्यान्न आपूर्ति से संबंधित कार्य अनुमंडल पदाधिकारियों का कोर कार्य है। जिलाधिकारी द्वारा अनुमंडल पदाधिकारियों को इस पर विशेष ध्यान देने का निदेश दिया गया।
बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम एवं बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम (आरटीपीएस) में राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप जिला में बेहतर प्रगति सराहनीय है। सभी लोक प्राधिकारों एवं अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के अंदर शत-प्रतिशत आवेदनों का गुणवत्तापूर्ण निष्पादन सुनिश्चित करने का निदेश दिया गया है। अधिकारियों को निदेशित किया गया है कि पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व के साथ जन-कार्यों के प्रति संवेदनशीलता सुनिश्चित करते हुए योजनाओं का सफल क्रियान्वयन करें। आरटीपीएस के तहत लाभुकों को लोक-कल्याणकारी योजनाओं की राशि मिलने में किसी भी प्रकार की शिथिलता, लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राशन कार्ड निर्माण में कोई भी विलंब स्वीकार्य नहीं है। लोक शिकायत निवारण के तहत लगाए गए दंड की राशि को संबंधित लोक प्राधिकार तीन दिनों के अंदर जमा करें तथा सुनवाई में लोक प्राधिकारों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करें। आरटीपीएस के तहत एक्सपायर्ड मामलों पर संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी या राजस्व संबंधी मामलों में संबंधित भूमि सुधार उप समाहर्ता लोक प्राधिकारों के विरूद्ध विधिवत दंड लगाकर प्रतिवेदन दें। हरएक अंचल में अंचल अधिकारी एवं थानाध्यक्षों की संयुक्त शनिवारीय बैठक नियमित तौर पर प्रभावी ढंग से आयोजित करें तथा अनुमंडल पदाधिकारी हर शनिवार को अपने-अपने क्षेत्रान्तर्गत किसी एक अंचल में बैठक में भाग लेकर भूमि विवादों के निष्पादन का अनुश्रवण करें। प्राप्त आवेदन पत्रों एवं उस पर कृत कार्रवाई की समीक्षा करें। भूमि विवादों का रूपांतरण विधि-व्यवस्था की समस्या में न हो। अन्यथा दोषी अधिकारियों के विरूद्ध जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी तथा नियमानुसार कार्रवाई किया जाएगा। परिवादों का सिर्फ निष्पादन पर्याप्त नहीं है। लोक शिकायतों का निवारण अपरिहार्य है एवं जनता की संतुष्टि अनिवार्य है। जिलाधिकारी, पटना
जिलाधिकारी ने कहा कि राज्य के नागरिकों के जीवन को आसान बनाने (ईज ऑफ लिविंग) की दिशा में राज्य सरकार द्वारा सुझावों का आमंत्रण किया गया है। हर व्यक्ति गरिमापूर्ण ढंग से जीवन-यापन कर सके इसके लिए सम्पूर्ण प्रशासनिक तंत्र सजग, तत्पर एवं प्रतिबद्ध है। सात निश्चय-3 के तहत ‘‘सबका सम्मान-जीवन आसान’’ (ईज ऑफ लिविंग) निश्चय की दिशा में तत्परतापूर्वक कार्य किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि इसके तहत लोक सेवा केन्द्रों (आरटीपीएस केन्द्रों) को भी उत्तरोत्तर बेहतर-से-बेहतर किया जाना आवश्यक है। आज की बैठक में पदाधिकारियों को लोक सेवा (आरटीपीएस) केन्द्रों को आवश्यकतानुसार तथा सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप सुदृढ़ीकरण एवं सौन्दर्यीकरण करने का निदेश दिया गया है ताकि यहाँ आम जनता को उत्कृष्ट सुविधा प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि इसके लिए अंचलों को राशि भी आवंटित की गई है। भविष्य में भी जरूरत के अनुसार अंचलों को राशि उपलब्ध करायी जाएगी।
जिलाधिकारी ने उप विकास आयुक्त, पटना को आरटीपीएस केन्द्रों का नियमित तौर पर निरीक्षण कराने तथा निरीक्षी पदाधिकारियों को चेकलिस्ट के अनुसार निर्धारित प्रपत्र में प्रतिवेदन देने का निदेश दिया।
जिलाधिकारी ने कहा कि हर 15 दिन पर वे लोक शिकायत निवारण एवं आरटीपीएस मामलों की शिड्यूल्ड एवं विस्तृत समीक्षा करेंगे। क्षेत्र भ्रमण के दौरान भी लोक सेवा केन्द्रों का निरीक्षण करेंगे। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ज़िलाधिकारी ने कहा कि बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 तथा बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम, 2011 का सफल क्रियान्वयन सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। सभी पदाधिकारी इसके लिए सजग, तत्पर एवं प्रतिबद्ध रहें।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को जनता दरबार, सीपीग्राम तथा मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से संबंधित मामलों को तत्परता से निष्पादित करने का निदेश दिया।
