पूर्णिया, (न्यूज़ क्राइम 24) विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर जिले के सभी अस्पतालों में जिलाधिकारी कुंदन कुमार के निर्देश पर सभी अधिकारियों एवं कर्मियों द्वारा तम्बाकू का सेवन नहीं करते हुए अन्य लोगों को इसके प्रति जागरूक करने की शपथ ली गयी। राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) में जीएमसीएच प्रिंसिपल, अस्पताल अधीक्षक और अस्पताल परिसर में संचालित ओपीडी के गैर संचारी रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडी सेंटर) में चिकित्सक एवं कर्मियों द्वारा आजीवन तम्बाकू का सेवन नहीं करने की शपथ ली गयी।
जिस दौरान मरीजों तथा उनके परिजनों को भी तंबाकू के सेवन से होने वाली खतरनाक बीमारियों के संबंध में विस्तृत रूप से चर्चा कर जानकारी दी गई। शपथ कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों ने यह शपथ ली कि वे लोग जीवन में कभी भी किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पादों का सेवन नहीं करेंगे और अपने परिजनों एवं परिचितों को भी तंबाकू उत्पादों एवं किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करने के लिए प्रेरित करेंगे। इसके साथ ही अधिकारियों द्वारा राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में जागरूकता रैली निकाली गई और लोगों को तम्बाकू को छोड़ते हुए जीवन को विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए जागरूक किया गया।
तम्बाकू निषेध दिवस के शपथ ग्रहण करने में जीएमसीएच प्रिंसिपल डॉ गौरीकान्त मिश्रा , अस्पताल अधीक्षक डॉ संजय कुमार, सिविल सर्जन डॉ ओ पी साहा, गैर संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ सुभाष कुमार सिंह, होमी भाभा कैंसर स्क्रीनिंग सेंटर डीटीओ डॉ ऐश्वर्या राय, डॉ गौरव कुमार, फाइनेंस सह लॉजिस्टिक सलाहकार केशव कुमार, मनोवैज्ञानिक धीरेंद्र कुमार, डब्ल्यूएचओ के सलाहकार सरवन आलम, जीएनएम और अन्य चिकित्सा अधिकारी और कर्मी उपस्थित रहे। इस वर्ष विश्व तम्बाकू निषेध दिवस का थीम “बच्चों को तम्बाकू उद्योग के हस्तक्षेप से बचाना” रखा गया है।
बहुत से बीमारियों को खत्म करने के लिए तम्बाकू निषेध जरूरी : प्रिंसिपल
राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) के प्रिंसिपल डॉ गौरीकान्त मिश्रा ने तम्बाकू निषेध दिवस की शपथ ग्रहण करने के साथ ही कहा कि तंबाकू के सेवन से लोग बहुत तरह के गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने का कारण भी तंबाकू सेवन है। वहीं फेफड़ों की बीमारियां जैसे: क्रोनिक ब्रोंकाइटिस व एम्फिसेमा होने की मुख्य वजह धूम्रपान को ही माना गया है। क्रोनिक यानी लंबे समय तक धूम्रपान करने से फेफड़े एवं सांस की नली में कैंसर होने की संभावना काफ़ी ज्यादा होती है। पूरे विश्व में कैंसर से होने वाली मृत्यु में फेफड़े के कैंसर के मरीजों की संख्या अधिक है। जिसका मुख्य कारण अत्यधिक धूम्रपान सेवन करना ही होता है। बीड़ी, सिगरेट, खैनी, पान मसाला, पुड़िया, जर्दा, पीला पत्ती आदि के सेवन से मुंह का कैंसर (ओरल कैंसर) की संभावना बनी रहती है। इन सभी तरह के रोगों से सुरक्षित रहने के लिए लोगों को तम्बाकू का सेवन नहीं करना आवश्यक है। इससे लोग जीवनभर गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रह सकेंगे।
जीएमसीएच ओपीडी में 1978 तम्बाकू मरीजों का हो सका है उपचार : अस्पताल अधीक्षक
जीएमसीएच अस्पताल अधीक्षक डॉ संजय कुमार ने कहा कि तम्बाकू से ग्रसित लोगों को तम्बाकू छोड़ने के लिए जीएमसीएच के ओपीडी में तम्बाकू नियंत्रण केंद्र फरवरी 2021 से संचालित है। यहां तम्बाकू से ग्रसित लोगों को नियमित उपचार के साथ ही काउन्सेलिंग करते हुए तम्बाकू छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। फरवरी 2021 से मई 2024 तक तम्बाकू नियंत्रण केंद्र में 1978 मरीजों का उपचार किया गया है। अस्पताल में तम्बाकू छोड़ने के लिए उपस्थित लोगों को हर महीने ब्लड प्रेशर और सुजर की जांच करने के साथ ही तम्बाकू छोड़ने के लिए मनोचिकित्सक द्वारा काउन्सेलिंग की जाती है। जो व्यक्ति अत्यधिक तम्बाकू सेवन से ग्रसित पाए जाते हैं उन्हें ओपीडी में कार्यरत मानसिक रोग विशेषज्ञ से आवश्यक परामर्श उपलब्ध कराई जाती है। चिकित्सक द्वारा प्राप्त निर्देश का उपयोग कर लोग तम्बाकू सेवन के आदत को त्यागते हुए स्वस्थ हो सकते हैं।
40 प्रतिशत कैंसर होने का कारण सिर्फ तंबाकू का सेवन : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ ओ पी साहा ने बताया कि तम्बाकू सेवन से लोगों को कैंसर बीमारी से ग्रसित होने की संभावना ज्यादा होती है। 40 प्रतिशत कैंसर सिर्फ तंबाकू के सेवन से होता है। बिहार में सबसे ज्यादा मुंह का कैंसर होता है जिसमें 90 प्रतिशत कैंसर तंबाकू सहित बीड़ी, सिगरेट, गांजा आदि के सेवन से होता है। तंबाकू का सेवन करने वाला सिर्फ अपना नहीं बल्कि आने वाली नस्लों को भी खराब कर देता है। अगर कोई गर्भवती महिला तम्बाकू का सेवन करती है तो इससे उनके होने वाले बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ता है। जैसे- जन्म के समय ही मृत्यु हो जाना, बच्चे का सही तरीके से विकास नहीं होना, कम वजन का बच्चा होना या कोई गंभीर बीमारी से ग्रसित होना। तंबाकू का सेवन करने से संबंधित व्यक्ति अपने जीवन के लंबे समय को 11 साल कम कर देते हैं। तंबाकू सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य को ही नहीं बल्कि हमारे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है। इसीलिए सभी लोगों को बिना देर करते हुए तम्बाकू का सेवन को समाप्त करना चाहिए। इसके लिए लोग अस्पताल पहुँचकर चिकित्सकों से परामर्श लेते हुए तम्बाकू सेवन का लत से छुटकारा पा सकते हैं।
डब्ल्यूएचओ के द्वारा वर्ष 1987 में की गई थी विश्व तंबाकू दिवस की शुरुआत: एनसीडीओ
जिला गैर संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ सुभाष कुमार सिंह ने कहा कि मानव के शरीर में नुकसानदायक बीमारियों की शुरुआत के पीछे तंबाकू का सेवन ही मुख्य कारण सामने आ रहा है। तंबाकू सेवन के प्रति आजकल न सिर्फ युवाओं में बल्कि स्कूली बच्चों में कुछ ज्यादा ही रुचि नज़र आने लगी है। कई तरह की गंभीर बीमारियों की जड़ तंबाकू सेवन ही माना जा रहा है। इसलिए इसको रोकने और इसके बारे में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 31 मई को पूरे विश्व में विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। विश्व तम्बाकू निषेध दिवस की शुरुआत डब्ल्यूएचओ द्वारा 1987 में की गयी थी। इस दिन का उद्देश्य तंबाकू सेवन के व्यापक रूप से प्रचार प्रसार और नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित करना होता है, जो पूरे विश्व में प्रत्येक वर्ष लगभग 70 लाख से अधिक मृत्यु का कारण बनता है।
