अररिया(रंजीत ठाकुर): जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम की मजबूती के लिये स्वास्थ्य कर्मियों के लिये विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। पांच दिवसीय प्रशिक्षण दो बैच में संचालित किया जा रहा है। प्रथम बैच का प्रशिक्षण 14 जुलाई को संपन्न हुआ। वहीं दूसरा चरण 15 से 19 जुलाई के बीच संचालित है। इसमें विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत एएनएम व जीएनमए को आईयूसीडी, पीपीआईयूसीडी, पीएआईयूसीडी विषय पर प्रशिक्षित किया जा रहा है। ताकि प्रशिक्षित कर्मियों की मदद से अधिक से अधिक लोगों तक इन सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा सके। इसमें सदर अस्पताल में कार्यरत ए ग्रेड नर्स नाजिया परवीण व मनीषा कुमारी मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका निभा रही हैं।
आईयूसीडी परिवार नियोजन का उपयुक्त माध्यम-
मुख्य प्रशिक्षक नाजिया परवीण ने बताया कि प्रशिक्षण में शामिल कर्मियों को परिवार नियोजन के लिये उपलब्ध संसाधनों की जानकारी दी गयी। उन्होंने बताया कि परिवार नियोजन के लिये आईयूसीडी सबसे उपयुक्त माध्यम है। स्वास्थ्य कर्मियों को दो बच्चों के बीच दो या दो से अधिक वर्ष के अंतराल के लिये आईयूसीडी के प्रयोग की जानकारी दी गयी। इस क्रम में उन्हें आईयूसीडी से होने वाले लाभ व लगाने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
आईयूसीडी के इस्तेमाल से सेहत को कोई नुकसान नहीं –
कार्यक्रम की मुख्य प्रशिक्षक मनीषा कुमारी ने बताया कि परिवार नियोजन के लिये महिलाएं चीर-फाड़ के डर से बंध्याकरण से डरती हैं। उनके लिये आईयूसीडी बेहतर विकल्प है। जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि प्रसव के 48 घंटे के अंदर पीपीआईयूसीडी, गर्भ समापन के बाद पीएआईयूसीडी व आईयूसीडी कभी भी नजदीकी सरकारी अस्पतालों में लगाया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से जहां अनचाहे गर्भ से बचा जा सकता है। वहीं इसके इस्तेमाल से सेहत को कोई नुकसान नहीं है।
दो बच्चों के बीच व अनचाहे गर्भ से बचाव का सुरक्षित जरिया-
सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया कि जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम की मजबूती को लेकर जरूरी प्रयास किये जा रहे हैं। प्रशिक्षण के उपरांत संबंधित एएनएम व जीएनएम अपने अपने स्वास्थ्य केंद्रों पर स्थानीय महिलाओं को इन सेवाओं की जानकारी देते हुए इसके इस्तेमाल के लिये उन्हें जागरूक करेंगी। पीपीआईयूसीडी के माध्यम से बच्चों में सुरक्षित अंतर रखने में मदद मिलती है। ये अनचाहे गर्भ से बचने व दो बच्चों के बीच सुरक्षित अंतर रखने का सुरक्षित व उपयोगी जरिया है। प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से मामूली जांच के बाद इसे लगाया जा सकता है। फिर दंपति जब भी बच्चा चाहें इसे अस्पताल जाकर निकाला जा सकता है।
