फुलवारीशरीफ(अजीत यादव): पटना के संपतचक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रखंड के आशा कार्यकर्ताओं का अपनी मांगों को लेकर लगातार तीसरा दिन धरना प्रदर्शन जारी रहा. देर शाम तक आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य केंद्र के बाहर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते रहे. इस दौरान एक आशा कार्यकर्ता की तबीयत बिगड़ गई जिसे इलाज के लिए उसी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।
आशा कार्यकर्ता दीपा ने बताया कि उन लोगों का मानदेय 10,000 करने समेत अन्य मांगे को लेकर धरना प्रदर्शन जारी है लेकिन कोई उनकी सुधि लेने के लिए अब तक नहीं पहुंचा है. स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी से लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी और जिला के अधिकारियों को उनकी मांगों और धरना प्रदर्शन के बारे में जानकारी है बावजूद अधिकारी तानाशाही रवैया अपनाते हुए हम आशा कार्यकर्ताओं की मांगो पर कोई विचार करने का आश्वासन नहीं देने आए हैं. उन्होंने बताया कि शनिवार को धरना प्रदर्शन के दौरान रामपुर की रहने वाली आशा कार्यकर्ता संगीता देवी की तबीयत बिगड़ गई.
आशा कार्यकर्ता संगीता देवी को इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया . उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है उनका धरना प्रदर्शन अनिश्चितकालीन जारी रहेगा .इन्होंने बताया की संपत चक प्रखंड के 87 आशा एवम 5 फैसीलेटर इस शीतकालीन धरना प्रदर्शन में शामिल हैं।
इनकी प्रमुख मांगों में आशा कार्यकर्ता एवं फैसिलिटेटरों को राज्य निधि से देय 1000 रु० मासिक बढ़ाकर 10 हजार रू० किया जाय,बकाया राशि का जल्द से जल्द भुगतान किया जाय,आशा कार्यकर्ताओं के भुगतान में व्याप्त भ्रष्टाचार- कमीशनखोरी पर सख्ती से रोक लगाई जाय , कोरोना काल की डियूटी के लिए सभी आशाओं- आशा फैसिलिटेटरों को 10 हजार रुपया कोरोना भत्ता भुगतान किया जाय,आशाओं को देय पोशाक (सिर्फ साड़ी) के साथ ब्लाउज, पेटीकोट तथा ऊनी कोट की व्यवस्था की जाय, और इसके लिए देय राशि का अद्यतन भुगतान किया जाय, फैसिलिटेटर के लिए भी पोशाक का निर्धारण और उसकी राशि भुगतान की शीघ्र व्यवस्था किया जाय, फैसिलिटेटरों को 20 दिन की जगह पूरे माह का भ्रमण भत्ता ( एसवीसी ) दैनिक 500/- रू की दर से भुगतान किया जाए, आशा कार्यकर्ता व आशा फैसिलिटेटरों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाय, कोरोना से (पुष्ट/ अपुष्ट) मृत आशाओं व आशा फैसिलिटेटर को राज्य योजना का 4 लाख और केंद्रीय वीमा योजना का 50 लाख राशि का भुगतान किया जाय।
आशा कार्यकर्ता – आशाफैसिलिटेटर को भी सामाजिक सुरक्षा योजना/पेंशन योजना का लाभ दिया जाय,जब तक नहीं किया जाता तब तक रिटायरमेंट पैकेज के रूप में लाख का भुगतान किया जाय, आदि प्रमुख मांगे हैं.जनवरी, 19 के समझौते के अनुरूप मुकदमों की वापसी सहित अन्य अकार्यान्वित बिन्दुओं को शीघ्र लागू किया जाय।
दरअसल, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की बुनियाद के रूप में आशा कार्यकर्त्ता व आशा फैसिलिटेटर सेवा देती आ रही हैं। इनकी सेवाओं का ही प्रतिफल है कि सरकारी संस्थागत प्रसव और जन्म-मृत्यु की दर में उल्लेखनीय स्तर तक उपलब्धि हासिल हुई है। मातृ-शिशु मृत्यु दर में भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रसंशनीया कमी के अलावा कई उपलब्धियां हासिल हुई हैं। इतना ही नहीं, प्रसवपूर्व तथा प्रसवोत्तर सहित अन्य टीकाकरण कार्य भी नियमित संचालित किया जा रहा है। इसके साथ ही समय समय पर सरकार द्वारा सौंपे गए अन्य कार्य भी उनके द्वारा काफी परिश्रम के साथ सम्पन्न किये जाते हैं। कोरोना महामारी के दरम्यान भी महामारी संबंधी विभिन्न निरोधात्मक कार्यक्रम को भी इन्होंने अपनी जान जोखिम में डाल कर पूरी मुश्तैदी व लगन के साथ पूरा किया है। जिस क्रम में कई आशाओं को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन से लेकर पटना उच्च न्यायालय तक ने भी इनके कार्यों की प्रशंसा की है।
