अररिया, रंजीत ठाकुर। सार्वजनिक दुर्गा मंदिर फुलकाहा में चल रहे तीन दिवसीय महाशिवपुराण कथा का समापन शिव पार्वती के झांकियों के साथ धूमधाम से बुधवार की शाम हो गई। कार्यक्रम में कथा वाचिका बीके प्रभा दीदी ने गणेश जी के स्वरूप का आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए कहा कि बड़ा सिर – गहन चिंतन, बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बड़े दृष्टिकोण का प्रतीक है, बड़े कान (सुपर्ण): दूसरों की बातों को ध्यान से सुनने और सकारात्मक विचारों को ग्रहण करने का प्रतीक, छोटी आँखें: एकाग्रता और सूक्ष्म दृष्टि, हर चीज़ को गहराई से देखने की शिक्षा देती हैं। लंबी सूँड़: बुद्धि, अनुकूलनशीलता और बहुमुखी प्रतिभा दर्शाती है। एक दाँत (एकदंत): एकाग्रता और ज्ञान के एक बिंदु पर केंद्रित होने का प्रतीक (एक दाँत ज्ञान के लिए, दूसरा टूट गया जो अहंकार या दोषपूर्ण ज्ञान के त्याग का प्रतीक है)। बड़ा पेट: जीवन के सभी अनुभवों को धैर्य से संभालने और पचाने की क्षमता। चार भुजाएँ: मन, बुद्धि, अहंकार और चित्त (चेतना) का प्रतिनिधित्व करती हैं।
गणेश जी के जन्म की कथा (हाथी का सिर) यह सिखाती है कि आध्यात्मिक साधक को अपने ज्ञान को परिष्कृत करना चाहिए, पुराने दोषपूर्ण ज्ञान को त्यागकर नए और शुद्ध ज्ञान को अपनाना चाहिए। वहीं इस कथा में शिव और पार्वती का विवाह समारोह मनाया गया एवं श्रद्धालुओं को शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनाई गई। उन्होंने कहा, यह कथा निष्काम भक्ति, कठोर तप और साधना का श्रेष्ठ उदाहरण है। कथा में बताया गया कि पूर्व जन्म में माता सती और इस जन्म में हिमालय की पुत्री पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। व्रत और संयम का पालन किया।
भगवान शिव ने कई परीक्षाएं लीं। माता पार्वती की श्रद्धा, धैर्य और समर्पण अटल रहा। अंत में ब्रह्मा जी की पहल पर शिव-पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ। कथा व्यास ने कहा, यह विवाह शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है। सृष्टि के संतुलन और लोक कल्याण का आधार है। वामन पुराण के अनुसार शक्ति के बिना शिव निष्क्रिय हैं। शिव के बिना शक्ति अधूरी है।दोनों का समन्वय ही सृष्टि की पूर्णता को दर्शाता है। श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा, तप, धैर्य और निष्काम भक्ति से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है। यह विवाह मानव जीवन को संयम, समर्पण और आध्यात्मिक चेतना के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। शिव महापुराण कथा के अंत में कथा वाचिका बी.के प्रभा दीदी का विदाई समारोह भी मनाया गया।
