फुलवारीशरीफ, अजित। दानापुर की क़दीमी और लगभग 700 वर्ष पुरानी खानक़ाह क़ादरिया चिश्तिया नेज़ामिया, मुहल्ला शाहटोली, दानापुर में मखदूम-ए-दानापुर हज़रत सैयद-उल-मज्जुबीन मखदूम सैयद शाह मोहम्मद यासीन क़ादरी चिश्ती नेज़ामी रहमतुल्लाह अलैह का 275वां उर्स मुबारक बड़े अदब, अकीदत और रूहानियत के माहौल में सम्पन्न हुआ।
उर्स की रसमात का आग़ाज़ बुधवार की सुबह सज्जादा नशीन हज़रत सैयद शाह अहमद सुल्तान क़ादरी चिश्ती नेज़ामी अशरफ़ी की सरपरस्ती में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत क़ुरानख़्वानी से हुई, जिसके बाद दिनभर जायरीन और अकीदतमंदों की भीड़ दरगाह शरीफ़ पर उमड़ती रही।
असर से मगरिब तक आयोजित महफ़िल-ए-समा (क़व्वाली) में मशहूर क़व्वालों ने सूफ़ियाना कलाम पेश कर रूहानियत से भरपूर समां बाँध दिया। इसके बाद चादरपोशी, क़ूल शरीफ़, फ़ातिहा और “मखदूम-ए-दानापुर यासीन हुसैन रिसाला” का विमोचन किया गया।
रिसाला का विमोचन पटना उच्च न्यायालय के सीनियर अधिवक्ता सैयद अरशद आलम और डाॅ. सैयद मोहम्मद मोजीरुल हक़ के हाथों संपन्न हुआ। इस अवसर पर पटना के विद्वानों, समाजसेवियों और शहर के गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की।
कार्यक्रम में पटना, दानापुर और आसपास के इलाक़ों से बड़ी तादाद में मुरीदीन, अकीदतमंदों और आम नागरिकों ने हाज़िरी दी। सज्जादा नशीन हज़रत सैयद शाह अहमद सुल्तान क़ादरी चिश्ती नेज़ामी अशरफ़ी ने मुल्क और सूबे बिहार की अमन-चैन, तरक़्क़ी और खुशहाली के लिए ख़ास दुआ की। खानक़ाह परिसर को इस अवसर पर रंग-बिरंगी रोशनियों और सजावट से जगमगाया गया था। साथ ही लंगर-ए-आम का भी शानदार इन्तेज़ाम किया गया, जिसमें सैकड़ों जायरीन ने शिरकत कर बरकत हासिल की।
दानापुर की यह प्राचीन खानक़ाह सदियों से सूफ़ी परंपरा, मोहब्बत और इंसानियत का पैग़ाम देने वाली तहरीक़ का मरकज़ रही है, जहाँ हर मज़हब और तबके के लोग अकीदत के साथ हाज़िरी देते हैं। इस अवसर पर सैय्यद शाह नेहालुद्दीन अहमद क़ादरी चिश्ती नेज़ामी दानापुर, सैयद मनोवर रिजवी चिश्ती, सैयद महताब चिश्ती, सज्जादानशीन शद्दाम एमादी, तलहा उस्मानी क़ादरी सहित कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
