शिक्षक एवं अन्य कर्मी दाने-दाने को मोहताज

किसी भी विकसित राष्ट्र की रीढ़ शिक्षा होती है और उस शिक्षा को समाज में सर्वमान्य करने वाले शिक्षक हमारी संस्कृति में श्रेष्ठ माने जाते रहे हैं लेकिन पिछले 15 माह से इन्हीं शिक्षकों की हालत बदतर हो गई है। शिक्षण कार्य से जुड़े कोचिंग संचालक एवं उस में कार्यरत शिक्षक एवं अन्य कर्मी दाने-दाने को मोहताज होने लगे हैं आर्थिक तंगी में लोग मानसिक तौर पर ग्रसित होकर कई इस दुनिया को छोड़ कर चले गए। इस संदर्भ में ऑल इंडिया प्राइवेट कोचिंग एसोसिएशन के सदस्यों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की एसोसिएशन के संस्थापक राशिद जुनैद कहते हैं कि हम कोचिंग संचालक व शिक्षक राष्ट्र निर्माण में लगे थे हमें क्या पता था कि यह दिन भी आएगा जब हम अपने परिवार की आजीविका के लिए दर-दर की ठोकरें खाएंगे आज दर्जनों कोचिंग संस्थान भाड़े की जमीन पर चलने के कारण बंद हो चुके हैं शिक्षक के परिवार में त्राहिमाम है। ऐसे में सरकार को तत्काल प्राइवेट शिक्षकों की सुध लेनी चाहिए और डीएलएड, बीएड, बीपीएड प्रशिक्षित शिक्षकों के आधार पर राहत मुहैया कराना चाहिए।

आईपका की कार्यकारिणी सदस्य सुमन केसरी बताती हैं कि प्रारंभ से ही शिक्षण कार्य में अत्यधिक रुचि रही है इसलिए हमने खास तौर पर लड़कियों को कंप्यूटर शिक्षा में सबल बनाने के उद्देश्य से वेब टेक्नोलॉजी की स्थापना की। लेकिन पिछले 15 माह से बंद पड़े कोचिंग का भाड़ा, बिजली बिल, कंप्यूटर सिस्टम आदि के खर्च का बोझ अब सहने लायक नहीं रह गया है। ऐसी परिस्थिति में महिला सशक्तिकरण का मेरा सपना कहीं सपना तो नहीं रह जाएगा इस बात का डर लगा रहता है। आखिर सरकार का शिक्षा को लेकर क्या उद्देश है यह समझ से परे है। सरकार तत्काल संस्थान को उचित मापदंड के साथ खोलने की अनुमति दें या हमारी आर्थिक मदद करें।

न्यू लक्ष्य पॉइंट के निदेशक अजय आनंद कहते हैं देश में हर व्यवसाय एवं उद्योग को संचालित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है तो किसी भी राष्ट्र के लिए शिक्षा के लिए यह दोहरी नीति क्यों किया जा रहा पिछले 15 महीने से कोचिंग संस्थानों के बंद होने से देश के नौनिहालों का भविष्य अंधकारमय हो गया है वहीं शिक्षक दाने-दाने के लिए मोहताज होने लगे हैं।

श्री प्रसाद कारपत कहते हैं देश की अब शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए अभिभावकों को आंदोलन करने की जरूरत है क्योंकि सरकार शिक्षा के प्रति दोहरा मापदंड अपना रही है जो राष्ट्रहित में काफी खतरनाक साबित हो सकता है। और हमारा भविष्य अंधकार में नहीं हो इसके लिए हमें आज भी अपनी कुर्बानी देने की आवश्यकता है।

आईपका के कार्यकारिणी सदस्य व लक्ष्य क्लासेज के निर्देशक महताब अंसारी कहते हैं कि हमने हर परिस्थिति में शिक्षण के कार्य को प्रारंभ होने की कोशिश की जब स्कूल- कोचिंग बंद हो गई तो हम लोग ऑनलाइन क्लास को बढ़ावा देने का प्रयास किए लेकिन सभी अभिभावकों द्वारा अपने बच्चों को मोबाइल उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण अधिकतर बच्चे 15 महीने से शिक्षा से पूर्ण रूप से वंचित हो हमें तो राष्ट्र के भविष्य बच्चों की चिंता सताती है।

अर्श टीचिंग सेंटर के निदेशक अरबाज अंसारी व बीके क्लासेस के बबलू कुमार पासवान करते हैं कि 15 महीनों में शिक्षा कार्य से जुड़े लोगों की स्थिति जर्जर हो गई है कितने कोचिंग संस्थान केवल इसलिए बंद हो गए क्योंकि वह भाड़े के मकान में संचालित थे मकान मालिक ने बकाया नहीं चुका पाने के कारण शिक्षा के मंदिर को उजाड़ दिया वही बिजली बिल भुगतान एवं अन्य कई प्रकार के खर्च बिना आमदनी के भुगतान करना पड़ रहा है जिसका दंश कोचिंग संचालकों के ऊपर साफ तौर पर दिखाई देता है।

कीइट इंटरनेशनल कम्प्यूटर सेन्टर के निदेशक कृष्णा मेहरा व स्पेक्ट्रम कोचिंग के निदेशक रंजीत शर्मा कहते हैं कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार को बच्चे स्कूल कोचिंग कैसे जाएं इसके लिए सोचना चाहिए और तत्काल वैक्सीनेशन का काम छात्र छात्राओं के लिए करना चाहिए। और सरकार अगर यह कार्य करती है तो इसमें हम लोग छात्र-छात्राओं को वैक्सीन लगाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे ताकि शिक्षा का मंदिर जल्द फिर से जगमग हो सके।

दिव्यांग शिक्षक मिकाइल अंसारी कहते हैं कि मुझे इस बात का बिल्कुल दुख नहीं कि मैं दिव्यांग हूं दुख तो अब इस बात का है कि मैं दिव्यांग होने के साथ प्राइवेट शिक्षक हूं। और हमने अपने परिवार की जीविका के लिए इस कार्य को चुना था और आज मैं शिक्षक हूं इसलिए बेरोजगार और बेबस बन बैठा हूं अगर ऐसी स्थिति रही तो मेरे जैसा कोई भी शारीरिक दिव्यांग कभी शिक्षक नहीं बनना चाहेगा और सोचने की बात यह है हमारा राष्ट्र निर्माण कैसे होगा आखिर हम सब भी तो इंसान हैं यूं ही कब तक घर पर बैठे रहेंगे हमारा पेट कौन भरेगा इन बातों पर सरकार को सोचना चाहिए और हम शिक्षकों को आर्थिक मदद देना चाहिए।

प्रियदर्शी फिजिक्स क्लासेस के निदेशक प्रियदर्शी कुमार, मां अम्बे ट्यूशन सेंटर के रंजीत यादव, लूसेंट क्लासेज के राकेश रंजन,अर्श टीचिंग सेंटर के अरबाज आलम, आरव कोचिंग के रौनक राज, फारूक क्लासेज के मो ० फारूक, बी०के० क्लासेज के बबलू कुमार, एंबिशन कोचिंग के अंकुश कुमार, जीनियस कोचिंग के जीशान अंसारी, स्टार मैथमेटिक्स कोचिंग के मुकेश कुमार, ब्राइट फ्यूचर एजुकेशन सेंटर हल्दिया के अंसार आलम, तन्हा कोचिंग सेंटर ढोलबज्जा के मंजूर तन्हा, और के अलावे पवन कर्ण आदि ने अपनी पीड़ा व्यक्त की और सरकार से तत्काल राहत देने के साथ कोचिंग संस्थानों को खोलने की कवायद की।