सिल्क इंडिया प्रदर्शनी में मॉडल्स ने किया सिल्क साड़ियों का प्रदर्शन

पटना: राजधानी के प्लेनेटोरियम हॉल में चल रही सिल्क इंडिया प्रदर्शनी में मंगलवार को सिल्क थीम पर आधारित कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जब मॉडल्स सिल्क की साड़ियां पहनकर दर्शकों के सामने आयी तो उनकी खूबसुरती के साथ सिल्क की चमक भी चारों ओर फैल गई। इस कार्यक्रम के दौरान मॉडल्स ने भारत के विभिन्न राज्यों के बुनकरों द्वारा तैयार किए गए साड़ियों का बहुत ही बेहतरीन ढंग से प्रदर्शन किया.
इस दस दिवसीय सिल्क इंडिया प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ से कोसा सिल्क, घीचा सिल्क साड़ी, मलबरी रॉ सिल्क, ब्लॉक प्रिंटेड सिल्क साड़ी, गुजरात से बांधनी, पटोला, एम्ब्रायडरी, गुजराती मिरर वर्क एवं डिजाइनर कुर्ती, जम्मू और कश्मीर से तबी सिल्क साड़ी, पशिमना शॉल, चिनान सिल्क साड़ी, जयपुरी कुती, ब्लॉक प्रिंट, सांगनेरी प्रिंट, कोटा डोरिया उत्तर प्रदेश से तंचोई बनारसी, जामदानी, जामावार ब्रोकेट ड्रेस मटेरियल, लखनवी चिकन, पश्चिम बंगाल से शांति निकेतन कांथा साड़ी, बालूचरी, निमजरी साड़ी, प्रिंटेड साड़ी, धाकई जामदानी, महाराष्ट्र की लोकप्रिय जरी पैठणी, तमिलनाडु से कोयम्बटोर सिल्क, कांजीवरम सिल्क, कर्नाटका से बेंगलुरु सिल्क, क्रेप और जार्जेट साड़ी, बेंगलुरु सिल्क, रॉ सिल्क मटेरियल, आंध्र प्रदेश से कलमकारी, पोचमपल्ली, मंगलगिरी ड्रेस मटेरियल उपाडा, गड़वाल, धर्मावरम, प्योर सिल्क साड़ी, बिहार से टसर, कांथा, भागलपुर सिल्क ड्रेस, मटेरियल, पंजाबी फुलकारी वर्क सूट व ड्रेस मटेरियल, ब्लॉक हैंडप्रिंट, कॉटन ड्रेस मटेरियल खादी सिल्क साड़ियां प्रस्तुत की गई है.

सिल्क इंडिया आर्ट एंड क्राफ्ट के प्रबंध निदेशक मानस आचार्य ने बताया कि इस आयोजन का मकसद बुनकरों की कला को लोगों को सामने लाना था। इस कार्यक्रम में प्रोफेशनल मॉडल्स ने देश भर के बुनकरों द्वारा तैयार वस्त्र पहनकर उनकी कला की नुमाइश की। एक से बढकर एक 15 मॉडल्स ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक के सिल्क उत्पादों को प्रदर्षित किया। कर्नाटक की कांजीवरम, बनारस की बनारसी, भागलपुर की कॉटन सिल्क, उड़ीसा की लिलम सिल्क सहित अन्य राज्यों की सिल्क साड़ियों को पहनकर जैसे ही मॉडल्स सामने आयी तो दर्शकों ने तालियों की गरगराहट के साथ उनका स्वागत किया। इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि मॉडल्स ने जिस प्रदेश की सिल्क साड़ियों की नुमाइश की वो उस प्रदेश के पारंपरिक वेस भूसा में थी जो इस कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना रहा था।