बिहार

सत्कर्म के रास्ते पर चलकर जीवन को धन्य बनाएं : देवकीनंदन भारद्वाज

फुलवारीशरीफ, अजित। जानीपुर देवी स्थान में आयोजित श्री श्री 1008 रुद्र महायज्ञ, शिव परिवार प्राण प्रतिष्ठा एवं राधा-कृष्ण प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर चल रहे पांच दिवसीय श्रीहरि कथा महोत्सव में कथा वाचक देवकीनंदन भारद्वाज जी महाराज ने श्रद्धालुओं को सत्कर्म, संस्कार और भक्ति का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि मनुष्य को सत्कर्म के मार्ग पर चलकर अपने जीवन को धन्य बनाना चाहिए।

महाराज जी ने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों से समाज में शांति, प्रेम और उत्तम संस्कारों का सृजन होता है. कथा के माध्यम से उन्होंने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को संस्कारों से जोड़ते हुए अभिभावकों से अपने बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ नैतिक एवं धार्मिक संस्कार देने की अपील की।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने भी गुरुकुल में रहकर शिक्षा एवं संस्कार ग्रहण किए थे. आज की शिक्षा केवल आधुनिक और रोजगारपरक बनकर रह गई है, जबकि नैतिक शिक्षा और संस्कारों के अभाव के कारण समाज में प्रेम, सद्भाव और मानवीय मूल्यों की कमी होती जा रही है।

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देवकीनंदन भारद्वाज जी महाराज ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को जीवन में सभी उपलब्धियां मिल जाएं, लेकिन उसके पास संस्कार और संतोष नहीं हो, तो वह संसार का सबसे कमजोर व्यक्ति है. उन्होंने कहा कि आज दुनिया में स्वार्थ की भावना बढ़ने के कारण शांति समाप्त होती जा रही है।

उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण ही मानव कल्याण का सबसे बड़ा साधन है. शिव महापुराण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शिव माता उमा से कहते हैं कि यह संसार एक स्वप्न के समान है और प्रभु भजन के बिना किसी भी मानव का कल्याण संभव नहीं है। कथा के दौरान जानीपुर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है. शिव प्राण प्रतिष्ठा एवं राधा-कृष्ण प्राण प्रतिष्ठा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

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