हाजीपुर/वैशाली, (न्यूज़ क्राइम 24) लोकतंत्र की जन्मस्थली वैशाली की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं भाषाई विरासत एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने जा रही है। नेपाल की राजधानी काठमांडू में 9 से 12 अगस्त 2026 तक आयोजित होने वाले तीसरे अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा पत्रकारिता सम्मेलन–2026 में बिहार के वरिष्ठ पत्रकार, मानवाधिकार टुडे के संपादक एवं मातृभाषा संरक्षण अभियान के अग्रणी हस्ताक्षर शशि भूषण कुमार भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी मातृभाषा बज्जिका में व्याख्यान देंगे। इनके साथ इस सम्मेलन में चर्चित व्यक्तित्व अजीत कुमार पांडेय संतोष कुमार एवं कृष्ण मोहन कुमार शामिल होंगे l
यह लगातार तीसरा अवसर होगा जब शशि भूषण कुमार अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा पत्रकारिता सम्मेलन में बज्जिका भाषा का प्रतिनिधित्व करेंगे। इससे पूर्व 2024 एवं 2025 में भी उन्होंने काठमांडू में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बज्जिका भाषा, वैशाली की लोकतांत्रिक परंपरा, भारतीय लोकसंस्कृति तथा मातृभाषाओं के संरक्षण पर अपने शोधपरक एवं प्रभावशाली व्याख्यान से विभिन्न देशों से आए भाषाविदों, साहित्यकारों, पत्रकारों एवं शोधकर्ताओं को प्रभावित किया था।
उनके मातृभाषा पत्रकारिता एवं भाषाई संरक्षण के उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए वर्ष 2025 में उन्हें नेपाल के मातृभाषा पत्रकारिता के प्रणेता धर्मादित्य धर्माचार्य की स्मृति में प्रदान किया जाने वाला प्रतिष्ठित “धर्मादित्य धर्माचार्य अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा पत्रकारिता सम्मान–2025” प्रदान किया गया था। यह सम्मान प्राप्त करने वाले वे प्रथम भारतीय बने, जिसे भारत ही नहीं, बल्कि समूचे दक्षिण एशिया में मातृभाषा पत्रकारिता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया।
शशि भूषण कुमार का मानना है कि विश्व के प्रथम गणराज्य वैशाली ने मानव सभ्यता को लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की अमूल्य विरासत प्रदान की। उसी ऐतिहासिक धरती की लोकचेतना, संस्कृति और सामाजिक जीवन से विकसित हुई बज्जिका केवल एक भाषा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सभ्यता की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक स्मृति की जीवंत अभिव्यक्ति है।
वे कहते हैं, “भाषा किसी भी समाज की आत्मा होती है। मातृभाषा का संरक्षण केवल शब्दों का संरक्षण नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, परंपरा और सभ्यता की निरंतरता को सुरक्षित रखने का अभियान है। मेरा संकल्प है कि विश्व के लोकतांत्रिक देशों के बीच वैशाली की मातृभाषा बज्जिका और उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पहुँचाकर उसे वैश्विक पहचान दिलाई जाए।”
काठमांडू सम्मेलन में अपने व्याख्यान के दौरान वे बज्जिका भाषा के इतिहास, साहित्य, पत्रकारिता, लोकसंस्कृति, वैशाली की लोकतांत्रिक विरासत तथा मातृभाषाओं के संरक्षण की वैश्विक चुनौतियों पर विस्तार से अपने विचार रखेंगे। उनका व्याख्यान भारतीय भाषाई विविधता और सांस्कृतिक अस्मिता को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा।
भाषा एवं संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े विद्वानों का मानना है कि इस सम्मेलन में बज्जिका की प्रभावशाली उपस्थिति केवल वैशाली और बिहार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की मातृभाषाओं के सम्मान, संरक्षण और वैश्विक प्रतिष्ठा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध होगी। यह सम्मेलन मातृभाषा आधारित पत्रकारिता, सांस्कृतिक संरक्षण और वैश्विक भाषाई संवाद को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।
