पूर्णिया, (न्यूज़ क्राइम 24) यदि पढ़ाई जारी रखने और अपने सपनों को पूरा करने का जज़्बा हो, तो जीवन की बड़ी से बड़ी मुश्किल भी इंसान के कदम नहीं रोक सकती। इसका प्रेरणादायक उदाहरण अररिया जिले के प्लासी की रहने वाली जीविका एवं प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के सेकेंड चांस कार्यक्रम की लर्नर चांदनी दीदी ने पेश किया है। चांदनी दीदी की 06 अगस्त 2026 को परीक्षा देकर घर लौटने के दौरान सड़क दुर्घटना हो गई थी। इस हादसे में उन्हें काफी चोटें आईं। उनकी स्थिति को देखते हुए परिवार के सदस्यों ने उन्हें आगे की परीक्षा में शामिल नहीं होने की सलाह दी। लेकिन चांदनी दीदी ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कार्यक्रम की टीम से फोन पर कहा, “मैं अपनी परीक्षा देना चाहती हूं। बस मुझे हिम्मत दीजिए और मेरे परिवार को भी समझा दीजिए, ताकि मुझे कोई परीक्षा देने जाने से न रोके।
चांदनी दीदी की इस इच्छा और पढ़ाई के प्रति उनके जज़्बे को देखते हुए कार्यक्रम समन्वयक श्री अंतिम कुमार सिन्हा एवं टीम ने उनके परिवार से बातचीत की और उन्हें परीक्षा में शामिल होने की इच्छा के बारे में समझाया। परिवार ने भी उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उनका साथ देने का निर्णय लिया। 08 अगस्त को बिजनेस स्टडीज की परीक्षा दिलाने के लिए उनके पति स्वयं उन्हें अपने साथ परीक्षा केंद्र लेकर पहुंचे। परीक्षा केंद्र पर श्री सिन्हा ने विद्यालय के प्राचार्य से मुलाकात कर चांदनी दीदी की परिस्थिति से अवगत कराया तथा उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए परीक्षा के दौरान आवश्यक सहयोग प्रदान करने का अनुरोध किया।
चोट और पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद परीक्षा देने पहुंचीं चांदनी दीदी का यह जज़्बा सभी के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बना हुआ है। उनका प्रयास यह संदेश देता है कि यदि मन में कुछ कर गुजरने का संकल्प हो, तो मुश्किल परिस्थितियां भी हमारे सपनों की राह नहीं रोक सकतीं।
चांदनी दीदी की परीक्षा को लेकर राज्यस्तर से भी लगातार सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहा। वरीय मार्गदर्शक एवं नेतृत्वकर्ता श्री संजय सिंह तथा जीविका के श्री राकेश कुमार लगातार कार्यक्रम की टीम और चांदनी दीदी के संपर्क में रहे, ताकि उन्हें परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और आवश्यक सहयोग समय पर उपलब्ध कराया जा सके। जीविका एवं प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के सेकेंड चांस कार्यक्रम के तहत वर्तमान में 1,082 शिक्षार्थी बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। इन शिक्षार्थियों की कहानियां यह साबित करती हैं कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने, आत्मविश्वास हासिल करने और अपने सपनों को पूरा करने का मजबूत रास्ता है।
