पटनासिटी, (न्यूज़ क्राइम 24) दशलक्षण महापर्व के चौथे दिन शनिवार को जैन समाज द्वारा उत्तम शौच धर्म की आराधना श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ की गई। प्रातःकाल जिनालयों में श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेन्द्र देव के दर्शन कर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। वातावरण जिनेन्द्र प्रभु की भक्ति एवं मंगलमय जैन स्तोत्रों से भक्तिमय बना रहा।
हाजीगंज लंगूर गली स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन गुरारा मंदिर एवं झाऊगंज स्थित श्री आदिनाथ काली बीबी कटरा जैन मंदिर में पूजा की शुरुआत मंगलाचरण एवं देव-शास्त्र-गुरु वंदना से हुई। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने विधिपूर्वक तीर्थंकर आदिनाथ भगवान , शांतिनाथ भगवान, पार्श्वनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा की। शांतिधारा के दौरान भगवान जिनेन्द्र देव के समक्ष सुख-शांति, आत्मकल्याण एवं विश्व मंगल की भावना की गई।
इसके बाद श्रद्धालुओं ने दशलक्षण धर्म की पूजा-विधि के अनुसार उत्तम शौच धर्म की पूजा-अर्चना की। पूजा में जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप एवं धूप आदि अर्घ्य समर्पित करते हुए जैन मंत्रों एवं पूजन पाठ का उच्चारण किया गया। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से जैन पाठ, स्तुति, मंगलाष्टक एवं भक्तामर स्तोत्र का पाठ किया। वहीं तीर्थंकर पुष्पदंत भगवान को निर्वाण लाडू चढ़ाकर मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया गया।
मीडिया प्रतिनिधि प्रवीण जैन ने बताया कि जैन दर्शन में उत्तम शौच धर्म का अर्थ मन की शुद्धता और संतोष से है। बाहरी वस्तुओं के संग्रह के बजाय आत्मा को राग-द्वेष, लोभ एवं विकारों से मुक्त करने की प्रेरणा उत्तम शौच धर्म देता है। यह धर्म साधक को संतोष, निर्मलता और आत्मचिंतन की ओर प्रेरित करता है। दशलक्षण महापर्व के इन दस दिनों में जैन अनुयायियों द्वारा प्रतिदिन एक-एक उत्तम धर्म की आराधना कर आत्मशुद्धि, संयम और सदाचार का संदेश आत्मसात किया जा रहा है।
