ग्रामीण इलाके की महिलाओं को जागरूक करना जरूरी

फूलवारीशरीफ(अजित यादव): असुरक्षित गर्भ समापन मातृ मृत्यु दर का एक प्रमुख कारक है और समुदाय में इस विषय पर जागरूकता फैलाने में मीडिया की सबसे अहम भूमिका है। उक्त बातें सुरक्षित गर्भपात पर मीडिया उन्मुखीकरण कार्यशाला में अपने संबोधन में आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन की प्रमुख तकनीकी विशेषग्य डॉ. सरिता बत्रा ने कहा। राजधानी पटना के एक होटल में सुरक्षित गर्भपात एवं स्वास्थ्य एवं प्रजनन अधिकार विषय पर मीडिया कार्यशाला का आयोजन आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ बिहार वोलंटरी हेल्थ एसोसियशन के कार्यपालक निदेशक स्वपन मजुमदार, आईपास के वरीय राज्य निदेशक निलेश कुमार एवं सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च बिहार के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक रणविजय कुमार ने संयुक्त रूप से द्वीप प्रज्वलित कर किया.

मीडिया की भूमिका सर्वोपरी –

रणविजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि समुदाय में इस नाजुक एवं महत्वपूर्ण विषय को लेकर चर्चा एवं जागरूकता फैलाने में मीडिया अग्रणी भूमिका निभा सकता है। मीडिया की विश्वशनीयता असुरक्षित गर्भसमापन जैसे विषय पर समुदाय में लोगों को इसके खतरे से अवगत कराने में एक सशक्त सहयोगी साबित हो सकता है। अपने धन्यवाद ज्ञापन में आई पास के वरीय राज्य निदेशक निलेश कुमार ने सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला में सांझा प्रयास नेटवर्क के सदस्य रामचंद्र राय, अपर्णा कुमारी, गीतिका शर्मा एवं बिहार वोलंटरी हेल्थ एसोसियशन के खुर्शीद एकराम अंसारी ने अपने अनुभव साझा किये। इस अवसर पर सुरक्षित गर्भसमापन विषय पर फोटो गैलरी एवं मीडिया कलेक्शन को भी प्रदर्शित किया गया.

असुरक्षित गर्भ समापन मातृ मृत्यु दर का एक प्रमुख कारक-

डॉ. सरिता बत्रा ने बताया कि असुरक्षित गर्भ समापन मातृ मृत्यु दर का एक प्रमुख कारक है और बिहार में हर वर्ष 149 महिलाओं की मृत्यु असुरक्षित गर्भसमापन के कारण होती है। इस विषय को लेकर समाज में कई अवधारणा जुडी हैं। अगर इस विषय पर गंभीरता से काम किया जाए तो हर वर्ष असुरक्षित गर्भपात से होने वाली 8 प्रतिशत मातृ मृत्यु को रोका जा सकता है। इस विषय पर एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है.

सुरक्षित गर्भ समापन मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में कारगर-

स्वपन मजुमदार ने बताया बिहार में एक वर्ष में होने वाले 12.5 लाख गर्भसमापन में से 84 प्रतिशत गर्भसमापन स्वास्थ्य केन्द्रों के बाहर होते हैं तथा 5 प्रतिशत गर्भसमापन अप्रशिक्षित सेवा प्रदाता द्वारा किये जाते हैं। असुरक्षित गर्भसमापन मातृ मृत्यु का एक प्रमुख कारण है, इसलिए इस विषय पर कार्य करने की नितांत जरुरत है।