गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल की प्रक्रिया को दुरुस्त बनाने की हो रही पहल

 गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल की प्रक्रिया को दुरुस्त बनाने की हो रही पहल

अररिया(रंजीत ठाकुर): प्रसव के उपरांत नवजात शिशुओं को बेहतर देखभाल की जरूरत होती है। बाल मृत्यु दर के मामलों पर प्रभावी नियंत्रण के लिहाज से इसे खासा महत्वपूर्ण माना गया है। यही कारण है कि संस्थागत प्रसव के मामले में शुरुआती दो दिनों तक मां व नवजात को अस्पताल में ही रहने की सलाह दी जाती है। गृह प्रसव के मामलों में तो शिशुओं का बेहतर देखभाल ज्यादा जरूरी हो जाता है। शिशु जन्म के शुरुआती 42 दिन अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए जिले में होम बेस्ड न्यू बोर्न केयर एचबीएनसी यानि गृह आधारित नवजात देखभाल कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत संस्थागत व गृह प्रसव दोनों ही स्थितियों में आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर जाकर 42 दिनों तक नवजात की खास देखभाल किये जाने का प्रावधान है। गृह आधारित देखभाल प्रक्रिया को मजबूती देने व इस कार्य में आशा कार्यकर्ताओं को सहूलियत प्रदान करने के उद्देश्य से उन्हें एचबीएनसी किट मुहैया करायी जा रही है। जिले की आशा कार्यकर्ताओं के बीच इसका वितरण भी शुरू हो चुका है।

किट में शामिल हैं सात महत्वपूर्ण सामग्री :

अररिया पीएचसी परिसर में विशेष शिविर आयोजित कर क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं के बीच एचबीएनसी किट का वितरण सोमवार को किया गया। एमओआईसी डॉ जावेद की अगुआई में बीएचएम सईदुर्रजमा व बीसीएम मो सरवर के द्वारा आशा कार्यकर्ताओं के बीच किट वितरित की गयी। जानकारी देते हुए डॉ जावेद ने बताया कि किट में डिजिटल वाच, डिजिटल थर्मामीटर, एलइडी टॉर्च व बैट्री, बेबी ब्लैंकेट, बेबी फीडिंग स्पून, किट बैग व वेटिंग स्केल जैसी सात सामग्री को शामिल किया गया है। जिसकी मदद से गृह भ्रमण के दौरान आशा कार्यकर्ताओं नवजात में होने वाली समस्याओं का अच्छे से पहचान कर जरूरी पड़ने पर उन्हें इलाज के लिये उच्च स्वास्थ्य संस्थान भेज सकेंगी।

प्रसव उपरांत बच्चों का गृह आधारित देखभाल महत्वपूर्ण :

बीएचएम सईदुर्रहमा ने बताया कि एचएनबीसी कार्यक्रम के तहत संस्थागत प्रसव की स्थिति में आशा कार्यकर्ता जन्म के 3, 7, 14, 21, 28 व 42 दिनों पर कुल 06 बार व गृह भ्रमण करती हैं। वहीं गृह प्रसव के मामले में 1, 3, 7, 14, 21, 28 व 42 वें दिन कुल 07 बार गृह भ्रमण करती हैं। प्रखंड सामुदायिक समन्वयक मो सरवर ने बताया कि सभी नवजात को आवश्यक देखभाल सुविधा उपलब्ध कराना व जटिलताओं से बचाना एचएनबीसी कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। समय पूर्व जन्म व कम वजन वाले बच्चों की पहचान व उनकी विशेष देखभाल करते हुए किसी बीमारी का शीघ्र पता लगाते हुए उपचार सुनिश्चित कराना साथ ही संबंधित परिवारों को आर्दश स्वास्थ्य व्यवहार के लिये प्रेरित करना कार्यक्रम का उद्देश्य है।

जिले की सभी 2522 आशा को उपलब्ध करायी जायेगी किट :

जिला सामुदायिक समन्वयक रमन कुमार ने प्रसिद्ध हेल्थ मैगजीन लेंसेट 2012 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि समय पूर्व शिशु का जन्म व कम वजन शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसके वजह से 35 फीसदी बच्चों की मौत हो जाती है। 20 फीसदी बच्चों की मौत के लिये निमोनिया व सांस अवरूद्ध होने संबंधी कारण जिम्मेदार होते हैं। वहीं शिशु मृत्यु से संबंधित 16 प्रतिशत मामलों में सेप्सिस व 09 प्रतिशत मौत विकलांगता की वजह से होती है। सही समय पर रोग की पहचान कर शिशुओं की जान बचाई जा सकती है। इस लिहाज से एचबीएनसी कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। शिशु के स्वास्थ्य संबंधी जांच को ज्यादा प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिले की सभी 2522 आशा कर्मियों को एचबीएनसी किट मुहैया करायी जानी है। वितरण के लिये किट जोकीहाट, नरपतगंज व रानीगंज को छोड़ कर शेष सभी प्रखंडों को उपलब्ध करा दी गयी है। जल्द ही शेष प्रखंड को भी वितरण के लिये किट मुहैया करा दी जायेगी।

न्यूज़ क्राइम 24 संवाददाता

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