पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) राज्य में पिछले कुछ वर्षों से लंबी अवधि के लिए परिवार को लंबी अवधि के अस्थायी साधन के रूप में सब डरमल इम्प्लांट और तीन महीने थ परिवार को सीमित करना के लिए एमपीए सबकुटेनीयस नया विकल्प लाभार्थियों के लिए उपलब्ध कराया गया है. इस साधनों के इस्तेमाल को लेकर अच्छी प्रतिक्रिया भी मिल रही है. चयनित जिलों में प्रशिक्षित चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा इन दोनों विकल्पों को लाभार्थियों को लगाया जा रहा है. 2025-26 में राज्य की 5873 महिलाओं ने सब डरमल इम्प्लांट लगवाकर समुदाय में सकारात्मक संदेश दिया है. वहीँ राज्य की 22486 महिलाओं ने इस अवधि में एमपीए सबकुटेनीयस का चुनाव किया है. 2024-25 में राज्य की 2420 महिलाओं को सब डरमल इम्प्लांट लगाया गया और 3800 महिलाओं ने एमपीए सबकुटेनीयस पर भरोसा जताया है।
इम्प्लांट एक माचिस की तीली के आकार की छोटी, पतली और लचीली रॉड है, जिसे महिला की बांह के ऊपरी हिस्से में त्वचा के नीचे लगाया जाता है. यह 3 साल तक अनचाहे गर्भ से सुरक्षा प्रदान करता है. सब डरमल इम्प्लांट लगाने की सुविधा राज्य के 13 जिलों यथा अररिया, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, गया, भागलपुर, नालंदा, पुर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, मुजफ्फरपुर, सारण, पटना और पश्चिम चंपारण के चयनित स्वास्थ्य संस्थानों में लगाया जा रहा है. वहीँ एमपीए सबकुटेनीयस राज्य के 15 जिलों यथा औरंगाबाद, बेगुसराय, बक्सर, जहानाबाद, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, मधुबनी, मुंगेर, शेखपुरा, शिवहर, सीतामढ़ी, सिवान, सुपौल और वैशाली के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में महिलाओं को लगाया जा रहा है. इम्प्लांट को सबसे पहले पटना और भागलपुर में प्रायोगिक तौर पर शुरू किया गया था. इम्प्लांट एक माचिस की तीली के आकार की छोटी, पतली और लचीली रॉड है, जिसे महिला की बांह के निचले हिस्से में त्वचा के नीचे लगाया जाता है. यह 3 साल तक अनचाहे गर्भ से सुरक्षा प्रदान करता है. वहीँ एमपीए सबकुटेनीयस एक अस्थायी गर्भनिरोधक है,जो अंतरा की सूई का अपग्रेड वर्जन है. यह इंजेक्शन प्री लोडेड होने के साथ तकनीकी रुप से भी उन्नत है, जिससे पहले की अंतरा सूई से बहुत ही कम चुभन के साथ लाभार्थी महिलाओं को लगाया जा सकता है. इस प्रयोगिक परियोजना को मुंगेर से पहले शेखपुरा जिले में शुरु किया गया था।
काउंसलिंग से स्वीकार्यता में आयी है तेजी :
स्वास्थ्य विशषज्ञों ने बताया कि अगर कोई महिला बीच में ही गर्भधारण करना चाहती है तो वह सब डरमल इम्प्लांट निकालने के कुछ दिनों में ही गर्भधारण के लिए तैयार हो जाती है. यह इसे अन्य उपलब्ध अस्थायी साधनों की तुलना में इसे विशेष बनाता है. यदि कोई महिला गर्भधारण में प्राथमिकता के आधार पर तीन साल साल की देरी करना चाहती है, तो इसमें सब डर्मल इम्प्लांट प्रभावी है. इम्प्लांट को सबसे पहले पटना और भागलपुर में प्रायोगिक तौर पर शुरू किया गया था. वहीँ एमपीए सबकुटेनीयस एक अस्थायी गर्भनिरोधक है,जो अंतरा की सूई का अपग्रेड वर्जन है. यह इंजेक्शन प्री लोडेड होने के साथ तकनीकी रुप से भी उन्नत है, जिससे पहले की अंतरा सूई से बहुत ही कम चुभन के साथ लाभार्थी महिलाओं को लगाया जा सकता है. इस प्रयोगिक परियोजना को मुंगेर से पहले शेखपुरा जिले में शुरु किया गया था।
