अररिया, रंजीत ठाकुर। मिजिल्स-रूबेला यानी खसरा रोग पांच साल तक के बच्चों की मौत का बड़ा कारण है। ये बीमारी खासतौर पर कम उम्र के बच्चों को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। एक बच्चे से दूसरे बच्चे में रोग का प्रसार आसानी से होता है। यह रोग सांस की नली, नाक व फेफड़ों को सक्रमित करता है। गौरतलब है कि एमआर टीकाकरण रोग से बचने का सबसे आसान जरिया है। वर्ष 2023 तक देश को मिजिल्स रूबेला से पूरी तरह मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित है। लिहाजा स्वास्थ्य विभाग शत प्रतिशत बच्चों को एमआर टीका से आच्छादित करते हुए निर्धारित लक्ष्य के प्राप्ति की दिशा में प्रयासरत है।
एक गंभीर संक्रामक बीमारी है मिजिल्स-रूबेला –
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मोईज ने बताया कि संक्रामक रोगों में मिजिल्स-रूबेला एक गंभीर व घातक बीमारी है। सही समय पर उपचार नहीं होने से ये बच्चों के लिये जानलेवा भी साबित हो सकता है। आमतौर पर मिजिल्स को खसरा रोग के नाम से भी जाना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक खसरा रोग संक्रमित व्यक्ति के खांसी या छींक के साथ निकलने वाली बूंदों में मौजूद वायरस हवा में फैल जाता है। जो संपर्क में आने वाले दूसरे व्यक्ति को भी प्रभावित करता है। रोग के लक्षण देर से दिखते हैं। संक्रमित मरीज को खांसी व बुखार के साथ शरीर पर खुजली वाले लाल दाने हो जाते हैं। ये दाने कानों के पीछे, गर्दन व सिर पर उभरते हैं। मरीज न्यूमोनिया व गंभीर डायरिया से पीड़ित हो जाता है। उचित उपचार नहीं होने की स्थिति में ये जानलेवा साबित होता है।
लक्षणों के आधार पर रोग की पहचान संभव –
मिजिल्स रूबेला की पहचान रोग से जुड़े सामान्य लक्षणों के आधार पर आसानी से किया जा सकता है। सूखी खांसी, गले में खराश, बहती नाक, आंखों में सूजन, त्वचा पर चकते का निशान कुछ ऐसे सामान्य लक्षण हैं। जिसके आधार पर रोग की पहचान संभव है। इसमें से किसी तरह का लक्षण दिखने पर तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में मरीज का इलाज जरूरी होता है।
कुपोषण व विटामिन ए की कमी रोग की वजह-
मिजिल्स-रूबेला रोग कई तरह की शारीरिक जटिलताएं खड़ी कर सकता है। ये अंधापन, मैनिन्जाइटिस, मस्तिष्क में सूजन, ब्रेन डैमेज जैसे स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बन सकता है। डीआईओ डॉ मोइज ने बताया कि विटामिन ए की कमी व कमजोर रोग प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण ये बच्चों को बड़ी आसानी से प्रभावित करता है। कुपोषित बच्चों को रोगग्रस्त होने का खतरा अधिक होता है।
बच्चों को जरूरी लगायें एमआर का टीका-
सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने कहा कि मिजिल्स रूबेला के खतरों से बचाव के लिये एमआर का टीकाकरण जरूरी है। शत प्रतिशत बच्चों के टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित टीकारकण अभियान संचालित है। इसके अलावा विशेष अभियान के माध्यम से भी शत प्रतिशत बच्चों को टीकाकृत करने का प्रयास जारी है। एमआर का पहला टीका बच्चे के नौ माह की आयु पूर्ण होने पर व दूसरा टीका सोलह से चौबीस माह के बीच लगाना जरूरी है। इसके साथ ही बच्चों को नियमित रूप से विटामिन- ए की दवा का सेवन कराना रोग से बचाव के लिहाज से जरूरी है।
