फुलवारी शरीफ, अजीत। गुरुवार को महावीर कैंसर संस्थान, पटना में भी ब्लड कैंसर जागरूकता अभियान पर कार्यक्रम किया गया.कार्यक्रम का उद्घाटन संयुक्त रूप से डा० बी० सन्याल, डा० मनीषा सिंह एवं डा० एल० बी० सिंह ने किया.दरअसल,सितम्बर का पूरा महीना, दुनियाभर में लोगों को ब्लड कैंसर के प्रति जागरूक करने के लिए मनाया जाता है.
डा० मनीषा सिंह, चिकित्सा निदेशक एवं प्रमुख मेडिकल ऑन्कोलॉजी ने कहा कि ब्लड कैंसर का नाम आते ही दिमाग में पहली बात आती है मौ,जबकि ऐसा नहीं है.बीमारी के प्रति सही कदम उठाया जाय तो इलाज की मदद से इससे बचा जा सकता है.ब्लड कैंसर के शुरूआती लक्षण इस प्रकार देखने को मिल सकता है. शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है और इसकी वजह से इन्फेक्शन होने लगता है. अचानक रूप से थकावट महसूस होना, चक्कर आना, कमजोरी का एहसास और शरीर में लगातार भारीपन महसूस होना.
अगर किसी को हल्के हाथों से खुजलाने पर भी त्वचा पर खरोच आ रही है या स्क्रेच से ब्लीडिंग शुरू हो जाती है, साथ ही त्वचा पर नीले धब्बे नजर आ रहे हैं तो यह ब्लड कैंसर के शुरूआती लक्षण हो सकते हैं. इसके अलावा अचानक वजन घटना, अधिक ठंड लगना, रात को पसीना आना, हड्डियों में दर्द महसूस होना, त्वचा में अधिक खुजली का एहसास, भूख न लगना, जी मिचलाने की समस्या, सिरदर्द का एहसास, सांस लेने में तकलीफ होना, पेशाब करने में कठिनाई, गंभीर पेट दर्द, मुंह में छाले पड़ना, त्वचा पर छोटे लाल धब्बे नजर आना, खांसी और उल्टी होना जैसी समस्या है तो तुरंत डाक्टर से सम्पर्क करनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि ब्लड कैंसर की शुरूआत शरीर की कोशिकाओं में डीएनए के अंदर म्यूटेशन के कारण होता है. ये खून या बोन मेरो में हो सकता है. इसके बाद यह खून में धीमे धीमे फैलता जाता है और व्हाइट ब्लड सेल्स का नुकसान करता जाता है.ब्लड कैंसर को मुख्य रूप से तीन प्रकार से समझ सकते हैं, जिन्हें ल्यूकीमिया, लिंफोमा और मल्टीपल माइलोमा कहते हैं.ल्यूकीमिया भी दो तरह के होते हैं, एक जिनमें बहुत तेजी से ब्लड कैंसर फैलता है और दूसरे वो जिनमें धीरे-धीरे कैंसर बढ़ता है. फिर लिंफोमा आते हैं, जिनमें कैंसर गांठ की तरह बन जाता है जिसमें कि मल्टीपल माइलोमा को बोनमेरो की बीमारी कहा जाता है.
डा० एल० बी० सिंह, चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि ब्लड कैंसर के इलाज के लिए महावीर कैंसर संस्थान में अति आधुनिक इलाज बोनमेरो ट्रांसप्लांट किया जा रहा है. अभी तक पिछले एक वर्ष में 16 मरीजों का सफलतापूर्वक बोनमेरो ट्रांसप्लांट हुआ है. अभी अधिकतर मल्टीपल मायलोमा के मरीजों का ट्रांसप्लांट हुआ है. संस्थान के विशेषकर डा० अविनाश उपाध्याय एवं दिल्ली के डा० राहुल भार्गव द्वारा बोनमेरो ट्रांसप्लांट किया जा रहा है.
अब तक ब्लड कैंसर का इलाज होमोलोगस पद्धति से हुआ है. आगे ऑटोलोगस पद्धति से ब्लड कैंसर का इलाज किया जाएगा. उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए नये कैंसर अस्पताल बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जल्द ही भवन निर्माण का कार्य प्रारंभ होगा.
संस्थान के निदेशक (प्रशासन) डा० बी० सन्याल, डा० विनिता त्रिवेदी, डा० अविनाश उपाध्याय एवं डा० अभिषेक ने भी अपने उदगार व्यक्त किये. कार्यक्रम में संस्थान के सभी वरीय चिकित्सक उपस्थित थे. इस अवसर पर कैंसर पीड़ित बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति की.
