अररिया, रंजीत ठाकुर : गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जरूरी व महत्वपूर्ण जांच की सुविधा उपलब्ध कराना प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का मुख्य उद्देश्य है। अभियान के क्रम में प्रत्येक महीने की 09 व 21 तारीख को जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेष शिविर आयोजित कर गर्भवती महिलाओं को जरूरी जांच, दवा व चिकित्सकीय सलाह नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है। गर्भावस्था के उच्च जोखिम वाले मामलों की ससमय पहचान, इसका कुशल प्रबंधन व संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना अभियान का मुख्य उद्देश्य है। पीएमएसएमए अभियान को अधिक प्रभावी व कारगर बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार से प्राप्त दिशा निर्देश के आलोक में राज्य में महीने में दो बार आयोजित होने वाले पीएमएसएमए सत्र को बढ़ा कर 03 दिन करने का निर्णय लिया गया है। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक सुहर्ष भगत ने इस संबंध में पत्र जारी कर सभी सिविल सर्जन को जरूरी दिशा निर्देश दिया है।
हर महीने में तीन दिन आयोजित होगा पीएमएसएमए दिवस
डीपीएम स्वास्थ्य संतोष कुमार ने बताया कि पीएमएसएमए अभियान का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के उच्च जोखिम वाले मामलों को चिह्नित करना है। पीएमएसएमए अभियान के क्रम में गर्भवती महिलाओं की जांच के अनुपात में हाई रिस्क प्रेगनेंसी के मामले चिह्नित नहीं हो पाने की वजह से विभागीय स्तर से अब हर महीने में तीन बार पीएमएसएमए अभियान के आयोजन का निर्णय लिया गया है। ताकि जांच की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार करते हुए संभावित हाई रिस्क के शत प्रतिशत मामलों को चिह्नित किया जा सके। लिहाजा पीएमएसएमए सत्रों को 02 दिन से बढ़ाकर 03 दिन किया गया है। आगामी जुलाई महीने से हर महीने 09, 15 व 21 तारीख को जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान आयोजित किया जायेगा।
एचआरपी की अपेक्षित दर हो सकेगा प्राप्त
जिला मूल्यांकन व अनुश्रवण पदाधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य संस्थानों में आयोजित पीएमएसएमए दिवस पर प्रसव पूर्व जांच के लिये बड़ी संख्या गर्भवती महिलाएं शामिल हो रही हैं। इसमें औसतन 07 फीसदी ही उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान हो रही है। जबकि अपेक्षित दर 15 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में पीएमएसएमए अभियान के क्रम में 17 हजार 910 गर्भवती महिलाओं का प्रसव पूर्व जांच किया गया। इसमें 1351 हाई रिस्क प्रेगनेंसी के मामले चिह्नित किये गये। जो कुल जांच का कुल महज 7।5 प्रतिशत है। जांच की गुणवत्ता में सुधार व एचआरपी के अपेक्षित दर की प्राप्ति के लिये विभागीय स्तर से यह नई पहल की गयी है।
गर्भावस्था के उच्च जोखिम वाले अधिक मामले हो सकेंगे चिह्नित
सिविल सर्जन डॉ केके कश्यप ने कहा कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान करते हुए इसका कुशल प्रबंधन करते हुए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने में पीएमएसएमए दिवस विशेष रूप से महत्व रखता है। जिले में मातृ-शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिहाज से भी यह अभियान विशेष महत्व रखता है। महीने में तीन दिन पीएमएसएमए दिवस आयोजित होने से जांच की गुणवत्ता में सुधार होगा। गर्भावस्था के उच्च जोखिम वाले अधिक से अधिक की मामलों पहचान संभव हो सकेगा।
