फुलवारी शरीफ़, अजित एम्स पटना में हाल ही में संस्थान के भीतर रैगिंग को रोकने के उद्देश्य से एक भव्य एंटी-रैगिंग जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया गया.इस दौरान प्रशासनिक ब्लॉक में एम्स पटना के छात्रों द्वारा रंगोली और पोस्टर प्रस्तुति के साथ रैगिंग के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और रैगिंग मुक्त परिसर बनाए रखने के लिए सबों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किया. इसके आलावा एंटीरैगिंग जागरूकता रैली आयोजित की गयी जिसका उद्देश्य रैगिंग के गंभीर परिणामों और इसके खिलाफ संस्थान की अटल शून्य-सहिष्णुता नीति को रेखांकित करना था.रैली में डीन (ए) डॉ. प्रेम कुमार, विभागाध्यक्ष ट्रॉमा सर्जरी और ईडी के ओएसडी डॉ. अनिल कुमार, डीन (छात्र मामले) डॉ. पुनम प्रसाद भदानी, रजिस्ट्रार डॉ. ज्योति प्रकाश, डॉ. सुशील कुमार, मिस आकांशा (कार्यकारी निदेशक के पीएस), प्रिंसिपल नर्सिंग कॉलेज रतीश नायर, सुरक्षा अधिकारी श्री प्रेम नाथ राय, सुरक्षा कर्मचारी, और अन्य संस्थान कर्मचारी सहित 300 से अधिक छात्रों और संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.एंटी-रैगिंग पर एक लघु फिल्म का प्रीमियर किया, जिसे सभागार में छात्रों के लिए प्रदर्शित किया गया. इस पहल का नेतृत्व डॉ. पल्लम गोपी चंद ने किया.

डॉ. प्रताप कुमार पात्रा द्वारा एक निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें कई छात्र प्रतिभागियों ने भाग लिया. एम्स एडमिन ब्लॉक में एक नुक्कड़ नाटक प्रदर्शन भी किया गया था. इस नुक्कड़ नाटक में दो टीमें शामिल थीं- एक एमबीबीएस कार्यक्रम से और दूसरी नर्सिंग कार्यक्रम से.एंटी-रैगिंग जागरूकता सप्ताह में शामिल सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार और प्रशंसा पत्र प्रदान किये गये.
एम्स निदेशक डॉक्टर जी के पाल के नेतृत्व में एक ओरिएंटेशन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जहाँ 600 से अधिक छात्रों ने सहभागिता दिखाई. इस ओरिएटेंशन कार्यक्रम में डॉ. जी.के. पाल ने छात्रों से किसी भी प्रकार की रैगिंग में भाग लेने से परहेज करने का आग्रह किया.उन्होंने इसका उल्लंघन के परिणामस्वरूप निष्कासन या निलंबन सहित कठोर दंड दिया जाएगा. डॉ. पाल ने कहा कि रैगिँग एम्स परिसर में सख्ती से प्रतिबंधित है और इसका उल्लंघन करने वालों को गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने होंगे.
डॉ. पाल ने पेशेवर और व्यक्तिगत करियर दोनों पर रैगिंग के हानिकारक प्रभावों पर प्रकाश डाला.साथ ही डॉ. प्रेम कुमार, डॉ. पुनम प्रसाद भदानी, डॉ. अनुप कुमार, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. ज्योति प्रकाश, नीलोत्पल बल और डॉ. राथिस नायर सत्र के दौरान अपने अनुभव साझा किए और छात्रों को रैगिंग में शामिल होने के गंभीर परिणामों को रेखांकित करते हुए बताया गया कि रैगिंग एक दंडनीय अपराध है.
