पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) बिहार प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने मुजफ्फरपुर में प्राइवेट अस्पताल में हुए अग्निकांड पर गहरी चिंता प्रकट करते हुए कहा कि बिहार में सरकार के स्तर से चिकित्सा व्यवस्था अगर बेहतर हुआ होता तो प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के लिए लोगों को जाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। सबसे बड़ी बात यह है कि प्राइवेट अस्पतालों में जो सुरक्षा के मानक है उसका ख्याल नहीं रखा जाता है और ना ही इस दिशा में सरकार के स्तर से गंभीरता दिखती है। बिहार में 200 से अधिक प्राइवेट अस्पताल चल रहे हैं, जिसमें सिर्फ 80 अस्पतालों ने ही फायर सेफ्टी और सुरक्षा मानक का ख्याल रखा है, बाकी 120 अस्पताल बिना सुरक्षा मानक और सेफ्टी फायर की व्यवस्था के चल रहे हैं ,क्योंकि सरकार के स्तर से ऐसे अस्पतालों को संरक्षण मिलता हैं।
श्री मंडल ने आगे कहा कि कल मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में आग से झुलसने से लोगों की मौत हुई उसपर सरकार के स्तर से और खास तौर से स्वास्थ्य मंत्री की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई गई जब मुजफ्फरपुर में आग से झुलस कर मरीजों की मौत हो रही थी, तब स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत कुमार मुजफ्फरपुर की बजाय दिल्ली चले गये। सबसे अफसोस की बात यह है इस घटना पर उन्होंने दुख प्रकट करना भी उचित नहीं समझा । जब सारे मीडिया और विपक्षी दलों ने ने सवाल खड़ा किया तो स्वास्थ्य मंत्री आनन फानन कल रात्रि में ही पटना वापस आ गए, लेकिन वो अब तक मुजफ्फरपुर पीड़ित परिवार से मिलने नहीं गए इसी से समझा जा सकता है की बिहार में संवेदनहीन सरकार है।
बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने की दिशा में सरकार के स्तर से सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था में कब सुधार होगा और प्राइवेट अस्पतालों पर सरकार कब लगाम लगाएगी जो सुरक्षा मानकों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और मरीजों को लूटने का काम कर रहे हैं बिहार में सरकार के संरक्षण में ही प्राइवेट अस्पतालों को फलने फूलने का मौका दिया जा रहा है, क्योंकि इन प्राइवेट अस्पतालों से सत्ता में बैठे हुए लोगों को हर प्रकार से लाभान्वित किया जाता है।
इन्होंने बिहार सरकार से अविलंब मृतकों के आश्रितों को 50 -50 लाख रुपए का मुआवजा और ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई की मांग की है ,जो सुरक्षा मानकों का ख्याल नहीं रखते हैं और मरीज को लूटने का काम कर रहे हैं। इन्होंने बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में सरकार के स्तर से मरीज के लिए सरकारी अस्पतालों में आईसीयू के साथ-साथ जांच की सारी सुविधा प्रदान करने, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और अन्य तरह की जांच सुविधा अस्पताल परिसर में ही स्थापित करने की मांग की है क्योंकि 20 सालों से बिहार में एनडीए का ही शासन काल है और नीतीश कुमार 20 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे और अब उनके सुपुत्र स्वास्थ्य मंत्री हैं तो स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार कब होगा इसे बताने का काम एनडीए के नेता करें।
