फुलवारीशरिफ, अजीत। एम्स पटना के कार्डियोलॉजी विभाग की ओर से टेरूमो इंडिया स्किल लैब के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय मास्टर काइजेन- एडवांस्ड टेक्नीक्स इन कोरोनरी बाइफरकेशन पीसीआई वर्कशॉप का शुभारंभ मंगलवार को दीप प्रज्वलन के साथ हुआ. 8 और 9 जुलाई तक चलने वाले इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य युवा हृदय रोग विशेषज्ञों को आधुनिक तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सिमुलेशन और इमेज-गाइडेड इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं के माध्यम से जटिल हृदय रोगों के उपचार में दक्ष बनाना है।
कार्यशाला का उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक ब्रिगेडियर प्रो. (डॉ.) राजू अग्रवाल ने किया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति एवं वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. भानु दुग्गल, जापान के साइसेकाई उत्सुनोमिया हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. केनिचिरो शिमोजी, एम्स पटना के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय कोर्स निदेशक डॉ. अनुपम भंभानी, चिकित्सा अधीक्षक, डीनगण, कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया (सीएसआई) बिहार चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार, टेरूमो इंडिया स्किल लैब के अध्यक्ष शिशिर अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक, संकाय सदस्य और देशभर से आए युवा कार्डियोलॉजिस्ट मौजूद रहे।
कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण एम्स पटना की कार्डियक कैथेटराइजेशन लैब से इमेज-गाइडेड परक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन (पीसीआई) का लाइव प्रसारण रहा. जापान के प्रसिद्ध इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. केनिचिरो शिमोजी और डॉ. अनुपम भंभानी ने संयुक्त रूप से दो मरीजों की जटिल एंजियोप्लास्टी प्रक्रिया का सफल लाइव प्रदर्शन किया. इस दौरान इंट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड (आईवीयूएस) तकनीक के माध्यम से स्टेंट प्रत्यारोपण की वैज्ञानिक योजना, सटीक स्थापना और उपचार के परिणामों के मूल्यांकन की आधुनिक विधियों का प्रदर्शन किया गया. विशेषज्ञों ने बताया कि इंट्राकोरोनरी इमेजिंग जटिल कोरोनरी रोगों के उपचार को अधिक सुरक्षित, सटीक और प्रभावी बनाती है तथा प्रिसिजन पीसीआई की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इसके बाद आयोजित इंटरैक्टिव वैज्ञानिक सत्र में वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शमशाद, डॉ. आशीष झा और डॉ. विपिन कुमार ने कोरोनरी बाइफरकेशन घावों के उपचार की नवीनतम तकनीकों, क्लिनिकल चुनौतियों और अपने व्यवहारिक अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा किए. वहीं वरिष्ठ कार्डियोवैस्कुलर सर्जन डॉ. संजीव कुमार और डॉ. प्रगति कपूर ने वैज्ञानिक सत्रों की अध्यक्षता करते हुए विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच विस्तृत अकादमिक चर्चा कराई।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए डॉ. अनुपम भंभानी ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा तेजी से तकनीक आधारित हो रही है. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित हाई-फिडेलिटी सिमुलेशन तकनीक चिकित्सकों को वास्तविक मरीजों पर प्रक्रिया करने से पहले जटिल परिस्थितियों का सुरक्षित अभ्यास करने का अवसर देती है. इससे तकनीकी दक्षता, निर्णय क्षमता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करने का आत्मविश्वास बढ़ता है, साथ ही मरीजों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है. उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में सुरक्षित और आधुनिक प्रशिक्षण प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पहल है।
ब्रिगेडियर प्रो. (डॉ.) राजू अग्रवाल ने कहा कि आधुनिक हृदय चिकित्सा का भविष्य सटीक तकनीक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और निरंतर कौशल विकास पर आधारित है. उन्होंने युवा हृदय रोग विशेषज्ञों से नवीनतम इंटरवेंशनल तकनीकों में दक्षता हासिल कर मरीजों को विश्वस्तरीय, सुरक्षित और साक्ष्य-आधारित उपचार उपलब्ध कराने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि डॉ. भानु दुग्गल ने युवा कार्डियोलॉजिस्टों से चिकित्सा नैतिकता, मानवीय संवेदनशीलता और तकनीकी उत्कृष्टता के बीच संतुलन बनाए रखने की अपील की. उन्होंने एम्स पटना के कार्डियोलॉजी विभाग की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम देश में हृदय रोग उपचार की गुणवत्ता को नई दिशा देने के साथ भारत और जापान के बीच चिकित्सा ज्ञान, कौशल और नवाचार के आदान-प्रदान को भी मजबूत करेंगे।
कार्यशाला के दूसरे दिन कोरोनरी बाइफरकेशन पीसीआई की उन्नत तकनीकों पर विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ व्यापक हैंड्स-ऑन सिमुलेशन प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा. इसमें युवा कार्डियोलॉजिस्ट अत्याधुनिक सिमुलेटरों पर विभिन्न जटिल क्लिनिकल परिस्थितियों में बाइफरकेशन स्टेंटिंग और अन्य जटिल इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अभ्यास करेंगे, जिससे उनकी प्रक्रियात्मक दक्षता, तकनीकी कौशल और निर्णय क्षमता को और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा।
