कटिहार, सूत्र : फलका प्रखंड (मोरसंडा) से आई इस तस्वीर को देखकर किसी का भी कलेजा कांप जाए। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच, कमलाघाट नदी के पानी और दलदल से होकर गुजरती यह अंतिम यात्रा बिहार के प्रशासनिक दावों को ‘जलसमाधि’ दे रही है।
क्या है पूरा मामला?
मोरसंडा निवासी 50 वर्षीय अरविंद महलदार जी का निधन हो गया। श्मशान घाट जाने के लिए रास्ता नहीं था, इसलिए ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर, घुटने भर पानी और कीचड़ के बीच से अर्थी को ले जाना पड़ा।
जनप्रतिनिधियों में आक्रोश:
स्थानीय जनप्रतिनिधियों (प्रमुख दीपशिखा सिंह, जिप प्रतिनिधि मनोज मंडल, उप प्रमुख नेहा प्रवीण, उप प्रमुख प्रतिनिधि मो इरसाद युवा समाजसेवी सागर मिश्रा का कहना है कि देश को आजादी 1947 में मिली, लेकिन मोरसंडा को आज तक कमला घाट पर एक अदद पुल नहीं मिला। सांसद और विधायकों ने सिर्फ वादे किए, काम नहीं। सवाल सीधा है: आखिर कब तक मोरसंडा के लोग इस नरकीय स्थिति को झेलने को मजबूर रहेंगे?
