बिहार

बाढ़ प्रभावितों की सुरक्षा, मदद और राहत के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद

पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) पटना जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव एवं सहायता कार्य पूरी तत्परता के साथ संचालित किए जा रहे हैं। प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा, सुरक्षित आवागमन, भोजन, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता तथा पशुधन की देखभाल के साथ-साथ दियारा क्षेत्रों में वन्यजीवों से संभावित खतरे से बचाव के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है।

जिलाधिकारी श्री कुन्दन कुमार ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में परिस्थितियों पर लगातार नजर रखें और आवश्यकता के अनुरूप संसाधनों की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करें। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों में तत्परता, संवेदनशीलता तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया है।

189 नौकाओं से सुरक्षित आवागमन और राहत कार्य-

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षित आवाजाही, आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों तक निकासी तथा राहत सामग्री पहुंचाने के लिए जिले में 189 नौकाएं सक्रिय हैं। इनमें अथमलगोला में 8, बख्तियारपुर में 21, बाढ़ में 7, दानापुर में 26, मनेर में 27, पाटलिपुत्रा में 19, पुनपुन में 3, फतुहा में 37, दीदारगंज में 32, मोकामा में 6, पालीगंज में 1 तथा फुलवारीशरीफ में 2 नौकाएं उपलब्ध हैं।

राहत एवं बचाव व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए अधिक आवागमन वाले संवेदनशील क्षेत्रों में एसडीआरएफ की 8 टीमें तथा एसएसबी की 2 टीमें तैनात की गई हैं।

दियारा क्षेत्रों में वन्यजीवों से सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था-

बाढ़ के कारण दियारा क्षेत्रों में जंगली सूअर एवं अन्य वन्यजीवों के आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने की संभावनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा लोगों की सुरक्षा के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

जिलाधिकारी श्री कुन्दन कुमार के निर्देश पर वन विभाग की रेस्क्यू टीम को दो रेस्क्यू वाहनों के साथ दियारा क्षेत्र में तैनात किया गया है। टीम द्वारा जंगली सूअर एवं अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सुरक्षित रूप से पकड़ने एवं आबादी वाले क्षेत्रों से दूर करने की कार्रवाई की जा रही है।

जिला प्रशासन द्वारा लोगों की सुरक्षा का हर संभव ख्याल रखा जा रहा है। नागरिकों से अपील की गई है कि यदि कहीं जंगली सूअर अथवा कोई अन्य वन्यजीव दिखाई दे तो उसे छेड़ें या उसके करीब जाने का प्रयास न करें। ऐसी स्थिति में तत्काल जिला प्रशासन अथवा वन विभाग को सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित टीम द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 20 मेडिकल कैंप और 34 एम्बुलेंस-

बाढ़ प्रभावित लोगों को उनके नजदीक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 20 मेडिकल कैंप सक्रिय किए गए हैं। मरीजों के त्वरित आवागमन एवं आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए 28 सामान्य एम्बुलेंस तथा 6 बोट एम्बुलेंस तैनात हैं।

बोट एम्बुलेंस प्रभावित क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर रही हैं और आवश्यकता के अनुसार लोगों तक चिकित्सा सुविधा एवं अन्य आवश्यक सहायता पहुंचा रही हैं। सामुदायिक रसोई केंद्रों के आसपास भी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

सामुदायिक रसोई केन्द्रो की संख्या बढ़कर हुई 34-

बाढ़ प्रभावित परिवारों को नियमित भोजन उपलब्ध कराने के लिए जिले में 34 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।

वर्तमान में बाढ़ अंचल में 1, दानापुर में 1, पाटलिपुत्रा में 2, अथमलगोला में 1, बख्तियारपुर में 3, मोकामा में 8, मनेर में 2, संपतचक में 1, दीदारगंज में 4, फुलवारीशरीफ में 1, मसौढ़ी में 3, पुनपुन में 4 तथा नौबत पुर में 3 कुल 34 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित हैं।

स्वच्छ पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई की व्यवस्था-

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पीएचईडी द्वारा आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। लोगों की दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त संख्या में अस्थायी शौचालय भी उपलब्ध कराए गए हैं।

राहत एवं सामुदायिक केंद्रों तथा आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए नगर निगम द्वारा नियमित साफ-सफाई कराई जा रही है।

पशुधन की सुरक्षा के लिए 15 पशु शिविर-

बाढ़ राहत व्यवस्था में पशुधन की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। प्रभावित क्षेत्रों में 15 पशु शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां पशुओं के उपचार, देखभाल एवं पर्याप्त चारे की व्यवस्था की गई है। अबतक 1000 क्विंटल से अधिक पशुचारा वितरण किया गया है एवं 1680 पशुओं का इलाज भी किया गया है। प्रभावित परिवारों की तात्कालिक जरूरतों को देखते हुए अब तक 6018 पॉलीथीन शीट्स का वितरण भी किया जा चुका है।

तटबंधों की सतत निगरानी, सड़कों की मरम्मत पर भी फोकस-

जिले के विभिन्न तटबंधों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जहां कहीं रिसाव, ओवरफ्लो अथवा अन्य समस्या सामने आ रही है, वहां जल संसाधन विभाग की टीमें तत्काल आवश्यक मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण कार्य कर रही हैं।

बाढ़ से प्रभावित सड़कों की भी आवश्यकता के अनुसार मरम्मत कराई जा रही है। जिन स्थानों पर अभी जलजमाव है, वहां पानी का स्तर कम होते ही सड़क की मरम्मत कर आवागमन को शीघ्र सामान्य किया जाएगा।

आवश्यकता के अनुसार लगातार बढ़ाए जा रहे संसाधन-

जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की निरंतर समीक्षा की जा रही है। स्थानीय परिस्थितियों एवं जरूरत के आधार पर राहत एवं बचाव संसाधनों को लगातार बढ़ाया जा रहा है। सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रभावित नागरिकों तक समय पर सहायता पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।

जिला प्रशासन द्वारा नदियों के जलस्तर, तटबंधों, संवेदनशील क्षेत्रों, राहत एवं बचाव गतिविधियों तथा दियारा क्षेत्रों में वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। परिस्थितियों के अनुरूप आवश्यक संसाधनों एवं व्यवस्थाओं को तत्काल सुदृढ़ किया जा रहा है।

जिलाधिकारी श्री कुंदन कुमार एवं पुलिस अधीक्षक श्री कार्तिकेय के शर्मा ने गंगा नदी के विभिन्न घाट एवं सामुदायिक रसोई केंद्र का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया. लोगों से बात कर उनका हाल चाल जाना. उन्होंने पुनपुन में भी बाढ़ राहत कार्य का जायजा लिया एवं अधिकारियों को पूरी संवेदनशीलता से काम करने के निदेश दिए।

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