बिहार

स्लाइड टू इनसाइट : सूक्ष्म कोशिकाओं से उभरा चिकित्सा शिक्षा का व्यापक भविष्य

पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) कभी अदृश्य, कभी अनदेखी सूक्ष्म दुनिया के रहस्यों को जब ज्ञान, कौशल और जिज्ञासा का साथ मिलता है तो वही विज्ञान एक नई दृष्टि बन जाता है। इसी विचार को साकार करते हुए AIIMS पटना के शरीर रचना विभाग ने “स्लाइड टू इनसाइट” कार्यशाला के माध्यम से एक ऐसा मंच तैयार किया जहां माइक्रोस्कोप के नीचे दिखने वाली संरचनाएं, भविष्य के चिकित्सा नवाचार की आधारशिला बनती नजर आईं। टिशू स्टेनिंग एवं इमेज एनालिसिस पर केंद्रित इस विशिष्ट कार्यशाला में लगभग 75 प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी ने इसे केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि ज्ञान का जीवंत अनुभव बना दिया जहां सीखना, समझना और सृजन एक साथ घटित हो रहे थे।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. (डॉ.) ब्रिगेडियर राजू अग्रवाल, निदेशक; प्रो. (डॉ.) पूनम भदानी, डीन (अकादमिक); प्रो. (डॉ.) संजय पांडेय, डीन (शोध); प्रो. (डॉ.) बीरेंद्र कुमार सिन्हा, सचिव, बिहार एवं झारखंड चैप्टर, एनाटॉमिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया; एवं प्रो. (डॉ.) महबूबुल हक, विभागाध्यक्ष, शरीर रचना विभाग की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। दीप प्रज्वलन के साथ जैसे ही कार्यक्रम का आरंभ हुआ, वातावरण में एक संदेश स्पष्ट था ज्ञान ही वह प्रकाश है जो अनदेखे को दृश्य और जटिल को सरल बना देता है।

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इस कार्यशाला ने प्रतिभागियों को केवल प्रक्रियाओं से परिचित नहीं कराया बल्कि उन्हें विज्ञान को अनुभव करने का अवसर दिया। टिशू प्राप्ति से लेकर प्रोसेसिंग, स्टेनिंग और उन्नत इमेजिंग तक की पूरी यात्रा को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया कि हर चरण एक नई खोज जैसा प्रतीत हुआ। यहां प्रयोगशाला केवल एक स्थान नहीं रही, बल्कि विचारों की प्रयोगशाला बन गई जहां हर प्रयास, हर अवलोकन और हर निष्कर्ष सीखने की एक नई परत जोड़ता गया। कार्यक्रम की सबसे विशिष्ट पहचान रही इसकी हैंड्स-ऑन ऊर्जा और संवादात्मक गहराई। प्रतिभागियों ने न केवल तकनीकों को सीखा बल्कि उन्हें महसूस किया, परखा और समझा। यह वही क्षण थे जहां जिज्ञासा ने कौशल का रूप लिया और ज्ञान ने आत्मविश्वास का। इस पहल ने एक गहरा संदेश दिया “चिकित्सा का भविष्य केवल पुस्तकों में नहीं बल्कि प्रयोगशालाओं में जन्म लेता है।” मूलभूत विज्ञान और नैदानिक अभ्यास के बीच सेतु बनाना ही आने वाले समय के कुशल और संवेदनशील चिकित्सकों की पहचान होगा।

समापन सत्र में प्रतिभागियों के अनुभवों ने इस कार्यशाला को एक यादगार अध्याय में बदल दिया। धन्यवाद ज्ञापन के माध्यम से सभी के योगदान को सराहा गया और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। एक ऐसा क्षण, जिसने पूरे आयोजन को ज्ञान, गर्व और उद्देश्य से जोड़ दिया। “स्लाइड टू इनसाइट” केवल एक कार्यशाला नहीं थी, यह एक दृष्टि थी, एक दिशा थी और एक संकल्प था। एक ऐसा संकल्प जो आने वाले चिकित्सा पेशेवरों को न केवल कुशल बनाएगा बल्कि उन्हें नवाचार और मानव सेवा के प्रति समर्पित भी करेगा। AIIMS पटना एक बार फिर यह सिद्ध करता है कि जब शिक्षा में रचनात्मकता, शोध में गहराई और प्रशिक्षण में उत्कृष्टता जुड़ती है तो परिणाम केवल सीखने तक सीमित नहीं रहता वह भविष्य गढ़ता है।

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