बिहार

मकर संक्रांति के मौके पर क्षेत्र के लोगों में उल्लास का माहौल

अररिया, रंजीत ठाकुर : संम्पूर्ण देश के साथ अररिया जिले में भी मकर संक्रांति को लेकर लोगों में जोश व उमंग का माहौल देखा जा रहा है। लोग नेपाल से निकलने वाली कोसी नदियों में सवेरे सुबह स्नान कर भगवान भास्कर को जल अर्पित कर अपने अपने घरों में पूजा अर्चना करते देखे गए हैं। इस महा पर्व को लेकर “न्यूज क्राइम के संवाददाता” ने फुलकाहा के जाने-माने ग्रामीण शिक्षण अरविंद कुमार से जब बात की तो उन्होंने कहा, “ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य की प्रथम किरणों के साथ गंगाजल से स्नान करके काले तिल, गुड़ एवं अरवा चावल के प्रसाद के साथ सूर्यदेव की उपासना करने से उनकी असीम कृपा प्राप्त हो जाती है तथा मानव एक बार पुनः ऊर्जावान ओजपूर्ण एवं तेजस्वी बन जाता है। 144 वर्षों के बाद पूर्ण महाकुंभ का संयोग इस वर्ष 14 जनवरी 2025 को हुआ है। गंगा जमुना सरस्वती की संगम स्थली प्रयागराज इस पूर्ण महाकुंभ के आगाज की गवाही दे रहा है। यह त्यौहार मकर संक्रांति से शुरू होकर बसंत पंचमी के दिन कमलासना माता सरस्वती की पूजा अर्चना से पूर्ण होने वाला है”।

बताते चलें कि वैदिक जीवन में जितने पर्व-त्योहार हैं वे सभी जीव जगत एवं उनके पर्यावरण के उन्नयन के लिए ही हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो इस धरा पर ऊर्जा का अखंड स्रोत सूर्य है। शीत ऋतु के आरंभ से सौर ऊर्जा की कमी होने से ठंड का प्रकोप होने लगता है। ठंड की प्रबलता में जनजीवन सिकुड़-सा जाता है। मकर संक्रांति वह समय है जब ठंड जा रहा होता है और गर्मी आ रहा होता है। यह संक्रमण काल है जहां दो स्थितियों में कौन कब प्रबल हो जाएगा या दुर्बल हो जाएगा यह अनिश्चित है। ऐसी स्थिति में जल से स्नान, तिल एवं गुड़ का सेवन लाभदायक हो सकता है।

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