बिहार

चक बैरिया में श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ व सूर्य नारायण प्राण-प्रतिष्ठा के लिए भव्य कलश यात्रा का शुभारंभ

फुलवारी शरीफ, (न्यूज़ क्राइम 24) संपतचक प्रखंड के चक बैरिया गांव में श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ एवं सूर्य नारायण प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर बुधवार को नव निर्मित श्री सूर्य नारायण मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई. भद्र घाट, पटना से गंगा जल लेकर श्रद्धालु पुनः महायज्ञ स्थल चक बैरिया पहुंचे. कलश यात्रा में हजारों की संख्या में महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हुए. मंत्रोच्चारण और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया.

कलश यात्रा का उद्देश्य आगामी महायज्ञ तथा नव निर्मित मंदिर और तालाब की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए पवित्र जल लाना था. यह धार्मिक अनुष्ठान 8 फरवरी 2026 तक चलेगा. कार्यक्रम का समापन जीयर स्वामी जी महाराज के करकमलों से होने वाले मुख्य अनुष्ठान एवं प्रवचन के साथ किया जाएगा. सात दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन के दौरान क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण बना रहेगा।

महायज्ञ स्थल को आकर्षक लाइटों से सजाया गया है तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए चौबीसों घंटे महाप्रसाद की व्यवस्था की गई है. आयोजन के दौरान सुरक्षा, साफ-सफाई और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. धार्मिक आयोजन के कारण पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।

सूर्य देव को सनातन धर्म में प्रत्यक्ष देवता माना जाता है. प्राण-प्रतिष्ठा का अर्थ होता है मंदिर में स्थापित प्रतिमा में वैदिक मंत्रों और विधि-विधान से दिव्य ऊर्जा का आह्वान करना. इसके बाद मंदिर केवल एक भवन नहीं बल्कि श्रद्धा और आस्था का जीवंत केंद्र बन जाता है. मान्यता है कि सूर्य देव की उपासना से रोग, दोष और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा जीवन में ऊर्जा और स्वास्थ्य का संचार होता है।

धार्मिक आयोजन से सामाजिक एकता को बढ़ावा

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ग्रामीण क्षेत्रों में महायज्ञ केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी होता है. इस प्रकार के आयोजनों में समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ भाग लेते हैं जिससे आपसी भाईचारा मजबूत होता है. महायज्ञ के दौरान होने वाले भंडारे, प्रवचन और धार्मिक कार्यक्रम लोगों को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य करते हैं।

यह महायज्ञ धार्मिक महत्व के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देने वाला माना जा रहा है. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय दुकानदारों और श्रमिकों को भी रोजगार मिलने की संभावना है. महायज्ञ आयोजन समिति के अध्यक्ष तारकेश्वर सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी स्वर्गीय धर्मपत्नी मुंगी देवी की स्मृति में मंदिर और तालाब का निर्माण अपने निजी खर्च से कराया है तथा महायज्ञ आयोजन में भी आर्थिक सहयोग दिया है. आयोजन समिति के कोषाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने बताया कि पिछले चार महीनों से मंदिर निर्माण और अनुष्ठान की तैयारी की जा रही थी।

क्या होता है महायज्ञ और इसका धार्मिक महत्व

सनातन परंपरा में महायज्ञ को अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है. महायज्ञ का अर्थ होता है सामूहिक रूप से भगवान की आराधना, वेद मंत्रों का उच्चारण और अग्नि के माध्यम से देवी-देवताओं को आहुति अर्पित करना. मान्यता है कि यज्ञ के माध्यम से वातावरण शुद्ध होता है और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यज्ञ केवल पूजा नहीं बल्कि लोक कल्याण का माध्यम होता है. यज्ञ से प्रकृति संतुलित रहती है, वातावरण पवित्र होता है और समाज में शांति, समृद्धि तथा सद्भाव का संदेश फैलता है. महालक्ष्मी नारायण महायज्ञ विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है. यह यज्ञ धन, वैभव, सुख-समृद्धि और परिवारिक कल्याण से जुड़ा माना जाता है। आयोजन को सफल बनाने में विक्की सिंह, वीरेंद्र सिंह, दिलीप सिंह, देवव्रत सिंह, दीपक सिंह, शैलेश सिंह, संतोष सिंह, वार्ड पार्षद राकेश सिंह, निशु सिंह, परमात्मा सिंह, अरविंद सिंह और मिट्ठू सिंह उर्फ विभूति कुमार सहित ग्रामीण सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।

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