नई दिल्ली, आशीष रंजन : आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दिल्ली विश्वविद्यालय इकाई ने किरोड़ीमल महाविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में ‘आपातकाल की स्मृतियाँ एवं दिल्ली विश्वविद्यालय’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की।
तिहाड़ बना था ABVP कार्यकर्ताओं का दूसरा घर
मुख्य अतिथि और अभाविप के पूर्व अध्यक्ष प्रो राजकुमार भाटिया ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। उस दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए अभाविप कार्यकर्ता अग्रिम पंक्ति में लड़े। सैकड़ों कार्यकर्ताओं को अन्यायपूर्ण तरीके से जेलों में बंद किया गया और तिहाड़ जेल आपातकाल के दौरान अभाविप कार्यकर्ताओं का दूसरा घर बन गया था। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ और शिक्षक समुदाय के साथ संघ परिवार के कार्यकर्ताओं का भी लोकतंत्र की पुनर्स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अनुशासन के नाम पर संविधान का हनन: प्रो अवनीश मित्तल
विशिष्ट अतिथि भास्कराचार्य कॉलेज के प्राचार्य प्रो अवनीश मित्तल ने कहा कि आपातकाल में अनुशासन के नाम पर लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मर्यादाओं का खुलेआम हनन हुआ। संविधान की मूल भावना से छेड़छाड़ की गई। ऐसे अन्याय का निर्भीक प्रतिरोध करने वाले संगठनों में अभाविप अग्रणी रहा। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को इस कालखंड से परिचित कराना जरूरी है ताकि लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत रहें।
लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प
संगोष्ठी में DU इकाई अध्यक्ष, इकाई मंत्री अभिनव, अक्षय और विभाग संयोजक गार्गी जोशी समेत कई शिक्षक, विद्यार्थी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने आपातकाल में लोकतंत्र की रक्षा करने वाले लोकतंत्र सेनानियों और अभाविप कार्यकर्ताओं को नमन किया। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर काम करने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ।
