पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं वर्तमान कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा जी ने आज संविधान हत्या दिवस के अवसर पर कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला दिन है जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी राजनीतिक सत्ता बचाने के लिए भारत के संविधान की आत्मा को कुचल दिया था। श्री सिन्हा ने कहा 51 वर्ष पूर्व आज ही की रात देश की जनता सोई थी और अर्धरात्रि को जब आँख खुली तो पता चला कि लोकतंत्र की हत्या हो चुकी है। विपक्ष के नेता जेलों में बंद थे, पत्रकारों की कलम पर ताला लग चुका था, और जनता के मौलिक अधिकार छीन लिए गए थे। यह संविधान की हत्या नहीं तो और क्या था?
श्री सिन्हा ने कहा इस तानाशाही के विरुद्ध सबसे मजबूत आवाज बिहार की धरती से उठी थी। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में बिहार से उठी संपूर्ण क्रांति की गूंज ने पूरे देश के युवाओं और छात्रों को एकजुट किया और तानाशाही ताकतों को उखाड़ फेंका। उन्होंने कहा कि बिहार की यह परंपरा रही है कि जब-जब देश पर अन्याय हुआ, यहाँ की जनता ने आगे बढ़कर लोकतंत्र की रक्षा की। जेपी का आंदोलन उसी भावना की अभिव्यक्ति था। श्री सिन्हा ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जो पार्टी आज संविधान बचाने की बात करती है, उसी पार्टी की सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 352 का घोर दुरुपयोग करके 21 महीनों तक देश को जेलखाना बना दिया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने अपनी राजनीतिक सत्ता बचाने के लिए संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया। यह संविधान की मूल भावना पर सीधा प्रहार था। कांग्रेस को जनता के सामने यह जवाब देना होगा।
आपातकाल के दौरान पत्रकारों की कलम पर प्रतिबंध लगाया गया, विपक्षी नेताओं को जेल में डाला गया, और कोई न अखबार में लिख सकता था, न बोल सकता था। ऐसे दमनकारी दौर में जिन लोकतंत्र सेनानियों और मीसा बंदियों ने यातनाएं सहकर भी झुकने से इनकार किया, श्री सिन्हा ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि इन वीरों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया। उनके संघर्ष ने भारतीय लोकतंत्र को नई ऊर्जा और नई दिशा दी। आज हम सब उनके ऋणी हैं। श्री सिन्हा ने संकल्प व्यक्त किया कृकि भारतीय जनता पार्टी और NDA की सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि देश में ऐसा काला अध्याय फिर कभी न दोहराए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार संविधान की मूल भावना न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व के प्रति प्रतिबद्ध है। 25 जून का यह दिन लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प दोहराने का दिन है।
