पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) राज्य में गर्मी की आहट के साथ ही बच्चों के लिए जानलेवा साबित होने वाले एईएस (चमकी) से निपटने के लिए राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह ‘अलर्ट मोड’ में है. अब जिला के आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर सीएचओ को एईएस गतिविधियों के क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. मालुम हो कि सीएचओ को आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर पर एईएस के लिए नोडल पदाधिकारी के रूप में चिन्हित किया गया है. अब सीएचओ आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर एईएस गतिविधियों का क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण करेंगी. इस बाबत राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा जरुरी दिशानिर्देश दिए हैं।
सेंटर की गतिविधियाँ एवं भूमिका हुई तय:
सेंटर से संबद्ध आशा अपने पोषक क्षेत्र में 1-15 वर्ष के बच्चों को उनके अभिभावक के मोबाइल नंबर के साथ सूची तैयार करेगी. साथ ही आशा अपने पोषक क्षेत्र में कुपोषित बच्चों को चिन्हित करते हुए उनकी सूचि तैयार करेगी. यदि कोई बच्चा एईएस प्रतिवेदित है तो उसके परिवार में पहले किसी बच्चे को एईएस हुआ है, इसकी भी जानकारी ली जाएगी. निर्देशानुसार सीएचओ/ए.एन.एम/आशा फैसिलिटेटर/आशा/आंगनवाड़ी सेविका/जीविका कर्मियों द्वारा नजदीकी स्वास्थ्य संस्थानों के एम्बुलेंस ड्राईवर, ई.एम.टी. का फोन नंबर रखा जाएगा. साथ ही आपातकालीन योजना के तहत मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना से संबद्ध वहां के चालक का नंबर भी रखा जाएगा.
आशा दिवस पर सीएचओ/ए.एन.एम/आशा फैसिलिटेटर/आशा/आंगनवाड़ी सेविका/जीविका कर्मियों का एईएस पर प्रशिक्षण दिया जाएगा और इसका अनुश्रवण किया जाएगा. टोल फ्री नंबर 102 एवं 104 से संबंधित फ्लेक्स बैनर का सेंटर पर प्रदर्शन करना होगा. दवाओं की निशुल्क उपलब्धता को प्रदर्शित करते हुए फ्लेक्स तैयार किया जाएगा।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर द्वारा गाँव में मष्तिष्क ज्वर का संदिग्ध मरीज मिलने पर निशुल्क एम्बुलेंस द्वारा नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के शिशु रोग विभाग में इलाज के लिए और मरीज के पहुँचने से पहले निकटतम स्वास्थ्य केंद्र/अस्पताल को मरीज के आने की सूचना दी जाएगी. पहले से मष्तिष्क ज्वर से पीड़ित बच्चे के स्वस्थ होकर अस्पताल से वापस आने पर यदि चिकित्सीय सलाह्नुसार बच्चा गंभीर रूप से कुपोषित हो तो उसे नजदीकी पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाएगा. मष्तिष्क ज्वर के मरीज में यदि दिव्यांगता के लक्षण हो तो तुरंत इसकी सूचना प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दिया जाएगा. साथ ही अपने क्षेत्र में सघन निगरानी की जाएगी और नियमित रिपोर्टिंग की जाएगी।
प्रोत्साहन राशि का प्रावधान:
चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा एईएस बीमारी सत्यापित किये जाने के बाद आशा कार्यकर्ता को 300 रूपए प्रत्येक मरीज की दर से प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है।
