फुलवारीशरिफ, अजीत। एम्स पटना के तंत्रिका शल्य चिकित्सा विभाग ने चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए मस्तिष्क की न्यूनतम चीरे वाली शल्य चिकित्सा के लिए स्वदेशी पेटेंट प्राप्त नलिकाकार मस्तिष्क प्रसारक विकसित किया है. यह अत्याधुनिक उपकरण अंतर्दर्शी मस्तिष्क शल्य चिकित्सा के साथ-साथ तंत्रिका मार्गदर्शन और रोबोटिक तकनीक से भी आसानी से जुड़ सकता है, जिससे छोटे चीरे के माध्यम से अत्यधिक सटीक मस्तिष्क शल्य चिकित्सा संभव होगी।
एम्स के अनुसार यह तकनीक मस्तिष्क के गहरे हिस्सों में स्थित गांठ, मस्तिष्क रक्तस्राव तथा रीढ़ की कुछ जटिल बीमारियों के उपचार को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, कम जटिल और किफायती बनाएगी. पारंपरिक खुली मस्तिष्क शल्य चिकित्सा की तुलना में यह उपकरण स्वस्थ मस्तिष्क ऊतकों को न्यूनतम क्षति पहुंचाते हुए प्रभावित हिस्से तक पहुंचने में सक्षम है।
इस तकनीक के उपयोग से मरीजों को कम रक्तस्राव, छोटा शल्य घाव, शीघ्र स्वास्थ्य लाभ, अस्पताल में कम समय तक भर्ती रहने, तंत्रिका संबंधी जटिलताओं का कम जोखिम तथा सामान्य जीवन में जल्द वापसी जैसे कई लाभ मिलेंगे।
इस उपकरण की विशेषता यह है कि आवश्यकता के अनुसार इसे चलायमान और स्थिर दोनों प्रकार के नलिकाकार प्रसारक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. साथ ही तंत्रिका मार्गदर्शन और रोबोटिक प्रणाली के साथ इसका समन्वय शल्य चिकित्सकों को 1 से 2 मिलीमीटर की सटीकता के साथ शल्य चिकित्सा करने में सक्षम बनाता है।
पूरी तरह भारत में विकसित यह उपकरण आयातित उपकरणों की तुलना में 80 से 90 प्रतिशत तक कम लागत में तैयार किया जा सकता है. इसके उपयोग से न्यूनतम चीरे वाली मस्तिष्क शल्य चिकित्सा की कुल लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है, जिससे अत्याधुनिक तंत्रिका शल्य चिकित्सा अधिक मरीजों की पहुंच में आ सकेगी।
इस स्वदेशी नलिकाकार मस्तिष्क प्रसारक का पेटेंट भारत सरकार ने एम्स पटना के तंत्रिका शल्य चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विकास चंद्र झा को प्रदान किया है. इस तकनीक पर आधारित शोध अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका न्यूरोसर्जिकल रिव्यू में भी प्रकाशित हो चुका है।
इस परियोजना का नेतृत्व डॉ. विकास चंद्र झा ने किया. इसमें डॉ. नितीश, डॉ. विवेक सारण सिन्हा, डॉ. गौरव, डॉ. राहुल, डॉ. संगम, बेहोशी चिकित्सा विभाग तथा संस्थान प्रशासन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिग.) डॉ. राजू अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह नवाचार आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की भावना को सशक्त करता है. उन्होंने कहा कि एम्स पटना भविष्य में भी स्वदेशी, विश्वस्तरीय और किफायती चिकित्सा उपकरणों के विकास को बढ़ावा देता रहेगा, ताकि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं कम लागत में अधिक से अधिक मरीजों तक पहुंच सकें।
