अररिया, रंजीत ठाकुर। एसएनसीयू यानी सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट नवजात शिशुओं के इलाज से जुड़ी आधुनिक व्यवस्था है। सदर अस्पताल परिसर में संचालित ये विशेष वार्ड जन्मजात बीमारियों के साथ पैदा होने वाले बच्चों के समुचित इलाज के प्रति समर्पित है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक हर दिन पैदा होने वाले करीब 20 फीसदी नवजात किसी न किसी रोग के शिकार होते हैं। इसलिये उन्हें तत्काल इलाज की जरूरत होती है। समुचित इलाज नहीं मिल पाने की स्थिति में नवजात की मौत का खतरा रहता है। गौरतलब है कि नवजात की मौत से संबंधित अधिकांश मामले प्रसव के 24 घंटों के अंदर घटित होते हैं। नवजात मृत्यु संबंधित मामले को नियंत्रित करने में एसएनसीयू की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते हुए विभागीय स्तर से इसके सफल संचालन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
कई कारणों से नवजात होते हैं जन्मजात बीमारी के शिकार –
सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ राजेंद्र कुमार ने बताया कि समुचित पोषण का अभाव, कम उम्र में शादी, एएनसी जांच की अनदेखी, समय पूर्व प्रसव, नवजात का संक्रमित होना, प्रसव के दौरान दम घुटना सहित अन्य कई कारणों से नवजात किसी जन्मजात विकार के शिकार हो सकते हैं। ऐसे बीमार नवजात को तत्काल सुविधाजनक इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने में एसएनसीयू यानी सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट की भूमिका महत्वपूर्ण है। लिहाजा इसके सफल संचालन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
अप्रैल से सितंबर तक 500 से अधिक नवजात का हुआ इलाज –
अस्पताल प्रबंधक विकास आनंद ने बताया कि अप्रैल से सितम्बर तक एसएनसीयू में करीब 500 बच्चों का सफल इलाज हुआ है। एसएनसीयू में सदर अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चे यानी इन बॉर्न व आउट बॉर्न (किसी अन्य सरकारी व निजी अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चे) को इलाज के लिये भर्ती कराया जा सकता है। बीते अप्रैल माह से लेकर सितंबर माह तक कुल 275 इन बॉर्न व 276 आउट बॉर्न बच्चों का एसएनसीयू में सफलतापूर्वक इलाज किया गया है।
नि:शुल्क उपलब्ध हैं नवजात के इलाज से जुड़ी सेवाएं –
सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया कि नवजात में रोग का पता लगाना मुश्किल होता है। जन्म के उपरांत बच्चों के वजन, आकार, आव-भाव, हरकत व लक्षणों के आधार पर रोगग्रस्त नवजात की पहचान की जाती है। जन्म के उपरांत बच्चों का नहीं रोना, शरीर व हाथ पांव का रंग पीला होना, हाथ-पांव ठंडा होना मां का दूध नहीं पीना, अधिक रोना, चमकी ,कटे तालू व होंठ सहित अन्य लक्षणों के आधार पर रोगग्रस्त नवजात की पहचान किये जाने की जानकारी उन्होंने दी।
इसके तत्काल बाद बच्चों को इलाज के लिये एसएनसीयू में भर्ती कराया जाता है। जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उनका इलाज होता है। एसएनसीयू सभी तरह के आधुनिक सुविधाओं से लैस है। फिलहाल इसे लेकर जिले में जागरूकता की कमी है। नवजात के इलाज से जुड़ी इस सेवा के प्रति जागरूक होकर लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिये। यहां सभी तरह की चिकित्सकीय सेवाएं पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध हैं।
