बिहार

करोड़ों की नल-जल योजना दम तोड़ती नजर आई, ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को मोहताज

अररिया, रंजीत ठाकुर। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘सात निश्चय’ नल-जल योजना नवाबगंज पंचायत में दम तोड़ती नजर आ रही है। करोड़ों रुपये की लागत से घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से स्थापित जलापूर्ति व्यवस्था आज अधिकांश जगहों पर बंद पड़ी है। कई वार्डों में नल-जल की टंकियां केवल शोभा की वस्तु बनकर रह गई हैं, जबकि ग्रामीणों को आज भी शुद्ध पेयजल के लिए भटकना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि योजना शुरू होने के बाद से ही उन्हें नियमित रूप से शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो सका। कई वार्डों में टंकियां कभी सुचारू रूप से संचालित ही नहीं हुईं, जबकि कहीं मोटर, पाइपलाइन और अन्य तकनीकी खराबियों के कारण जलापूर्ति पूरी तरह ठप है। इससे सरकार की करोड़ों रुपये की योजना पर सवाल उठने लगे हैं।

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ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय लापरवाही और समय पर रखरखाव नहीं होने के कारण योजना पूरी तरह विफल साबित हो रही है। भीषण गर्मी और बरसात के मौसम में भी लोग निजी चापाकलों और अन्य स्रोतों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।
इस संबंध में पीएचईडी, नरपतगंज के कनीय अभियंता रितेश कुमार ने बताया कि संबंधित संवेदक की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। वर्तमान स्थिति का सर्वे एवं जांच कराई जा रही है। नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यक मरम्मत एवं जलापूर्ति व्यवस्था को पुनः चालू कराया जाएगा। इधर, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पीएचईडी के वरीय अधिकारियों से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी एजेंसी पर कार्रवाई करने तथा अविलंब नल-जल योजना को चालू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जनहित की इस महत्वपूर्ण योजना पर खर्च की गई सरकारी राशि का लाभ लोगों तक नहीं पहुंचना गंभीर चिंता का विषय है।

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