बिहार

युद्ध के साये में भी नहीं डिगा हौसला, रूस में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही फुलवारी की दीपाली का पटना लौटने पर भव्य स्वागत

फुलवारीशरिफ, अजीत। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के माहौल में भी फुलवारी शरिफ की बेटी दीपाली चंद्रा ने अपना हौसला नहीं खोया. बम धमाकों और तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच भी वह रूस में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं. एक वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब वह अवकाश पर अपने घर पटना पहुंचीं तो परिवार, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने पटना एयरपोर्ट पर फूल-माला, बुके और गुलदस्ता देकर उनका भव्य स्वागत किया.साथ में गोला रोड पटना की छात्रा सृष्टि भी उसी यूनिवर्सिटी से मेडिकल पढ़ाई कर रही है जो दीपाली के साथ में पटना लौटी है .महिलाओं ने उनका अभिनंदन करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

दीपाली चंद्रा मॉस्को के समीप स्थित पर्म सिटी की पर्म स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा हैं. एमबीबीएस का पाठ्यक्रम लगभग साढ़े पांच वर्ष से अधिक अवधि का है. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर मैट्रिक, इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पटना के सेंट कैरेन्स स्कूल से पूरी की. विदेश से मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने का सपना उन्होंने पहले से ही संजो रखा था।

दीपाली ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल डॉक्टर बनना नहीं, बल्कि अपने राज्य बिहार, खासकर पटना और ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब एवं जरूरतमंद लोगों की सेवा करना है. उन्होंने कहा कि आज भी कई ग्रामीण इलाकों में लोगों को समय पर बेहतर इलाज नहीं मिल पाता है. ऐसे मरीजों की सेवा करना ही उनके जीवन का लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि चुनौतियां चाहे कितनी भी बड़ी हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो तो डर अपने आप खत्म हो जाता है।

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दीपाली के पिता प्रफुल्ल चंद्रा शिक्षक से व्यवसायी बने हैं और वर्तमान में भवन निर्माण एवं रियल एस्टेट के क्षेत्र में कार्यरत हैं. उनकी माता पूनम चंद्रा गृहिणी हैं. छोटी बहन रिया चंद्रा फिलहाल बारहवीं कक्षा की छात्रा हैं. परिवार ने कहा कि दीपाली की उपलब्धि पूरे परिवार के साथ-साथ क्षेत्र के लिए भी गर्व की बात है।

युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों के बीच भी मेडिकल शिक्षा जारी रखकर दीपाली चंद्रा ने यह साबित किया है कि मजबूत इरादों के आगे कठिन से कठिन हालात भी बाधा नहीं बन सकते. उनका सपना डॉक्टर बनकर अपने देश लौटना और समाज के अंतिम पंक्ति के लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना है।

दीपाली के पिता प्रफुल्ल चंद्रा ने कहा कि उनकी बेटी शुरू से ही मेधावी रही है. उसकी लगन, मेहनत और प्रतिभा को देखते हुए परिवार ने उसे रूस के मॉस्को के पास स्थित पर्म स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए भेजने का निर्णय लिया. उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल बेटी को डॉक्टर बनाना नहीं है, बल्कि उसे एक संवेदनशील चिकित्सक बनाना है, जो अपने ज्ञान और सेवा भाव से देश, विशेषकर बिहार के गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा कर सके. हमें विश्वास है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अपने सपने को साकार करेगी और समाज के लिए प्रेरणा बनेगी।

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