बिहार

अक्षय तृतीया पर नवाबगंज में जागरूकता कार्यक्रम, बाल विवाह के खिलाफ दिलाई गई शपथ

अररिया, रंजीत ठाकुर। अक्षय तृतीया सतर्कता दिवस के अवसर पर ग्राम पंचायत राज नवाबगंज में पंचायत बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की अध्यक्ष सह मुखिया सरिता देवी की अध्यक्षता में मध्य विद्यालय नवाबगंज परिसर में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ लोगों को जागरूक करना एवं समाज को इसके उन्मूलन के लिए प्रेरित करना था। इस अवसर पर बाल अधिकारों की सुरक्षा एवं बाल विवाह की रोकथाम के लिए कार्यरत जागरण कल्याण भारती, फारबिसगंज ने अररिया जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए सामूहिक भागीदारी की अपील की। संगठन द्वारा पंचायतों, स्कूलों और धर्मगुरुओं के सहयोग से गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है तथा हजारों लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई जा चुकी है। विशेष रूप से अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर प्रशासन के सहयोग से रोकथाम हेतु अभियान तेज किया जाता है।

कार्यक्रम का संचालन मध्य विद्यालय नवाबगंज के प्रधानाध्यापक संजय कुमार ने किया। इस दौरान फूलकाहा थाना के एएसआई पी. के भारती, उप मुखिया हसीब अंसारी, विकास मित्र लक्ष्मण ऋषिदेव, एसएसबी 56वीं बटालियन फूलकाहा कंपनी के एएसआई रंजीत सिंह, समाजसेवी अरुण यादव सहित विद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राएं, जीविका समूह की महिलाएं एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसर की आड़ में बाल विवाह जैसे अपराध को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन एवं सामाजिक संगठनों की सतर्कता से अब इस दिन होने वाले बाल विवाहों में कमी आई है, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त करना आवश्यक है।

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह दंडनीय अपराध है। इसमें शामिल होने या सहयोग करने वाले सभी व्यक्तियों—जैसे बाराती, कैटरर, डेकोरेटर, बैंड-बाजा संचालक, मैरेज हॉल मालिक तथा विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहित या मौलवी—पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है, जिसमें दो वर्ष तक की सजा एवं जुर्माना शामिल है। जागरूकता अभियानों के सकारात्मक प्रभाव से अब जिले में लोग स्वयं बाल विवाह की सूचना प्रशासन को दे रहे हैं, जिससे समय पर कार्रवाई संभव हो पा रही है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान के तहत शपथ भी ली और समाज से इस कुप्रथा को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लिया।

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